'कांग्रेस में नहीं होगा TMC का विलय...'कल्याण बनर्जी ने अटकलों पर लगाया पूर्णविराम, 24 घंटे में बदले सुर, अभिषेक को बताया बेटे जैसा

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अभूतपूर्व राजनीतिक संकट के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में चल रही टीएमसी के कांग्रेस में विलय (Merger) की तमाम अटकलों को पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, महज 24 घंटे पहले पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले कल्याण बनर्जी के सुर अब पूरी तरह बदले हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने शनिवार को सुलह का रुख अपनाते हुए अभिषेक बनर्जी को अपने 'बेटे जैसा' बताया है।

ममता-सोनिया की मुलाकात के बाद तेज हुई थीं विलय की अफवाहें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी को मिली हार और उसके बाद 19 लोकसभा सांसदों की संभावित बगावत के बीच यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी अपना अस्तित्व बचाने के लिए कांग्रेस में विलय कर सकती है। इस चर्चा को हवा तब और मिली जब हाल ही में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दिल्ली में सोनिया गांधी से और अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

इन तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए कल्याण बनर्जी ने दोटूक शब्दों में कहा:

"तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस पार्टी के साथ विलय नहीं होने जा रहा है, यह खबरें पूरी तरह निराधार हैं। रही बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क करने की तैयारी कर रहे बागी सांसदों की, तो उन्हें जो करना है करने दें। वे सब भाजपा की चाल का हिस्सा हैं। वे अपने क्षेत्रों के विकास का बहाना बना रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जो लोग अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कदम तक नहीं रख सकते, वे क्या खाक विकास करेंगे? जो 19 सांसद बागी हुए हैं, उन्हें भाजपा भी खुलकर स्वीकार नहीं करेगी।"

कल्याण बनर्जी के अलावा टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी दिल्ली में इन खबरों को भ्रामक बताया। कीर्ति आजाद ने कहा कि कोई विलय नहीं होगा, टीएमसी आगामी चुनाव एक मजबूत गठबंधन के हिस्से के रूप में ही लड़ेगी और यह गठबंधन भविष्य में भी बरकरार रहेगा। इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने भी विलय की संभावनाओं को खारिज किया था।

24 घंटे में पिघला गुस्सा: 'बेटे की गलती माफ करना पिता का फर्ज'

इस पूरे सियासी ड्रामे में सबसे दिलचस्प मोड़ अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के रिश्तों को लेकर आया है। महज एक दिन पहले कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर 'अहंकारी' होने का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दे दिया था कि 'वे या तो अपने भतीजे को चुनें या फिर उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं को।' यही नहीं, कल्याण ने अभिषेक के सभी अदालती मामलों की पैरवी करने से भी खुद को अलग कर लिया था।

लेकिन शनिवार को अचानक उनके तेवर बेहद नरम हो गए। कल्याण बनर्जी ने कहा:

"अभिषेक मेरे बेटे जैसा है। अगर बेटे से कोई गलती हो भी जाती है, तो उसे माफ करना एक पिता का ही काम होता है। इस समय देश और पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खतरे में है। राज्य में आज जैसी स्थिति है, वैसी पहले कभी नहीं रही, जहां विपक्ष को इस कदर प्रताड़ित किया जा रहा हो। पुलिस और भाजपा मिलकर हमें परेशान कर रही हैं। ऐसे समय में हम सबको एकजुट होना होगा।"

अभिषेक के 'बचपन वाले' बयान से शांत हुआ वरिष्ठ सांसद का क्रोध

दरअसल, इस विवाद को शांत करने की पहल खुद अभिषेक बनर्जी की तरफ से हुई थी। पार्टी की एक अहम बैठक के बाद ममता बनर्जी के कालीघाट आवास से निकलते हुए अभिषेक ने बेहद परिपक्वता दिखाते हुए मीडिया से कहा था, "कल्याण बनर्जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने मुझे बचपन से देखा है। अगर वे मुझे दो-चार कड़ी बातें कह भी देते हैं, तो उन्हें इसका पूरा हक है। इस पर किसी को अनावश्यक विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है।"

अभिषेक के इसी सम्मानजनक बयान के बाद कल्याण बनर्जी का गुस्सा शांत हो गया। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बात करते हुए कहा, “मैं उनके इस बयान का स्वागत करता हूं। यह अच्छी बात है कि उन्होंने अपनी गलती को समझा। अब हमारा एकमात्र लक्ष्य मिलकर भाजपा के खिलाफ लड़ना है।”