21 साल से भारत में बैन है ऑस्कर नॉमिनेटेड ये फिल्म, वाराणसी में जला दिया गया था सेट; अक्षय कुमार भी थे हिस्सा
सिनेमाई इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्होंने अपनी बोल्ड और संवेदनशील कहानियों से समाज को झकझोर कर रख दिया। इन दिनों भले ही अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर मनोरंजन जगत में भारी विवाद छिड़ा हुआ है, लेकिन देश में फिल्मों पर पाबंदी का इतिहास काफी पुराना है। आज हम आपको एक ऐसी ही 21 साल पुरानी बहुचर्चित और बेहद विवादित फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम चमकाया, एकेडमी अवॉर्ड्स (Oscars) में देश का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन खुद अपने ही देश भारत में रिलीज के लिए तरस गई। भारी घमासान और विरोध प्रदर्शनों के बाद इस फिल्म को भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।
वाराणसी में सेट पर हुआ था हिंसक पथराव और आगजनी, फिल्म को बताया गया था 'एंटी-हिंदू'
हम बात कर रहे हैं मशहूर इंडो-कैनेडियन फिल्ममेकर दीपा मेहता की एलिमेंट्स ट्रिलॉजी की तीसरी और सबसे चर्चित कड़ी 'वॉटर' (Water Movie) की। साल 2005 में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्माण किसी बुरे सपने से कम नहीं था। दीपा मेहता इस फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी (काशी) के घाटों पर करना चाहती थीं। लेकिन इससे पहले समलैंगिकता पर बनी उनकी फिल्म 'फायर' को लेकर देश में पहले से ही दक्षिणपंथी संगठन और लोग काफी गुस्से में थे। जैसे ही लोगों को पता चला कि दीपा मेहता 'वॉटर' नाम से अगली फिल्म बना रही हैं, वाराणसी में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म की कहानी को 'हिंदू विरोधी' (Anti-Hindu) करार दिया और पवित्र शहर में बने फिल्म के करोड़ों के आलीशान सेट को आग के हवाले कर दिया। इस भारी बवाल और सुरक्षा कारणों के चलते फिल्म की शूटिंग को बीच में ही अनिश्चितकाल के लिए रोक देना पड़ा था।
अक्षय कुमार बनने वाले थे फिल्म के असली हीरो, शबाना आजमी और नंदिता दास को भी छोड़नी पड़ी फिल्म
पॉपुलर मैगजीन 'वैरायटी इंडिया' को दिए एक पुराने इंटरव्यू में निर्देशक दीपा मेहता ने इस फिल्म के बैकस्टेज सीक्रेट्स से पर्दा उठाते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया था। दीपा मेहता ने बताया था कि फिल्म 'वॉटर' की ओरिजिनल स्टार कास्ट आज की कास्ट से बिल्कुल अलग थी। इस फिल्म के मुख्य हीरो बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार (Akshay Kumar) थे, जबकि उनके साथ शबाना आजमी और नंदिता दास लीड रोल में नजर आने वाली थीं। अक्षय कुमार ने फिल्म के लिए बकायदा लुक टेस्ट भी दे दिया था। लेकिन वाराणसी में हुए उस भयानक विवाद के बाद फिल्म का काम करीब 3 से 4 साल तक पूरी तरह ठप रहा। बाद में जब हालात सामान्य हुए, तो अक्षय कुमार और पुरानी स्टार कास्ट के साथ डेट्स की समस्या आ गई। इसके बाद दीपा मेहता ने पूरी स्टार कास्ट को बदलते हुए जॉन अब्राहम, लीजा रे, सीमा बिस्वास, सरला और मनोरमा को साइन किया और फिल्म की पूरी शूटिंग भारत के बजाय श्रीलंका में गुपचुप तरीके से पूरी की।
क्या है 'वॉटर' की झकझोर देने वाली कहानी, जो आज भी भारत में ओटीटी पर है ब्लॉक?
वर्ष 1938 की पृष्ठभूमि (ब्रिटिश काल) पर आधारित इस फिल्म की कहानी भारत में विधवा महिलाओं की सामाजिक दुर्गति, शोषण और उनके दर्दनाक जीवन को बेहद संजीदगी से दिखाती है। फिल्म का मुख्य केंद्र 'चुइया' नाम की एक महज 8 साल की मासूम बच्ची है, जो बचपन में ही विधवा हो जाती है। रूढ़िवादी परंपराओं के चलते उस नन्हीं बच्ची को समाज से दूर पापों का प्रायश्चित करने के लिए एक विधवा आश्रम में छोड़ दिया जाता है, जहां उससे उम्मीद की जाती है कि वह अपनी पूरी जिंदगी केवल सादगी, सफेद कपड़ों और भगवान की प्रार्थना में बिताए।
विदेशी समीक्षकों ने इस फिल्म की तुलना विश्व सिनेमा के मास्टरपीस से की और जॉन अब्राहम के वकील वाले किरदार को उनके करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन अभिनय माना गया। यह फिल्म ऑस्कर में 'बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म' की कैटेगरी में नामांकित भी हुई, लेकिन दुखद बात यह है कि 21 साल बीत जाने के बाद भी यह ऐतिहासिक फिल्म आज तक भारत में बैन है और देश का कोई भी नागरिक इसे नेटफ्लिक्स, जियो सिनेमा या किसी भी अन्य ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कानूनी रूप से नहीं देख सकता है।