'यह देश का दुर्भाग्य है...': चुनाव से पहले बंगाल में अफसरों के तबादले पर बरसे CJI सूर्यकांत, याचिका खारिज

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में चुनाव से ऐन पहले अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा किए गए ट्रांसफर के खिलाफ दायर याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान CJI ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था और राज्य-आयोग के बीच गहराते अविश्वास पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे 'देश का दुर्भाग्य' करार दिया।

भरोसे की कमी: जब चुनाव आयोग और सरकार के बीच छिड़ी जंग

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की भारी कमी है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "यह देश का दुर्भाग्य है कि अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS) को बनाने का जो मुख्य उद्देश्य था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है।" कोर्ट ने याद दिलाया कि अविश्वास का आलम यह है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए भी सुप्रीम कोर्ट को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी। आयोग को राज्य के अफसरों पर भरोसा नहीं है और राज्य को उन पर यकीन नहीं जिन्हें आयोग लेकर आया है।

1100 अफसरों का रातों-रात तबादला: क्या कहता है कानून?

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि बंगाल में अधिसूचना जारी होते ही करीब 1100 अधिकारियों, जिनमें मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे बड़े पद शामिल थे, का रातों-रात तबादला कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने बड़े बदलाव से पहले राज्य सरकार से सलाह लेना अनिवार्य नहीं था? हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए किनारे कर दिया कि चुनाव के दौरान तबादले पिछले 20-25 सालों से एक स्थापित परंपरा बन चुके हैं और यह कोई नई बात नहीं है।

बाहरी पर्यवेक्षक हमेशा बेहतर: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

जब वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य सचिव के तबादले को लेकर आपत्ति जताई, तो CJI सूर्यकांत ने तार्किक सवाल किया। उन्होंने पूछा कि जो अधिकारी तैनात किए गए हैं, क्या वे दूसरे राज्यों के हैं? नहीं, वे सभी पश्चिम बंगाल कैडर के ही सेवारत अधिकारी हैं, तो उनके पद बदलने से क्या फर्क पड़ता है? कोर्ट ने साफ लहजे में कहा, "बाहर से आया कोई पर्यवेक्षक या निष्पक्ष अधिकारी हमेशा सबसे अच्छा होता है।" जस्टिस बागची ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि आजकल बंगाल के चुनाव 'चुनावी मुकदमों' का खुला मैदान बन गए हैं।

कानूनी सवाल को रखा खुला: क्या राज्य से पूछना जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया जिसने इस जनहित याचिका को खारिज किया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को 'खुला' (Open) रखा है। वह सवाल यह है कि— क्या चुनाव आयोग को प्रशासनिक फेरबदल से पहले राज्य सरकार से परामर्श करना अनिवार्य है? कोर्ट ने कहा कि इस पर किसी अन्य उपयुक्त मामले में विस्तार से फैसला किया जाएगा।