लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण विधेयक: सरकार के पास नहीं जुटा 'जादुई आंकड़ा'
India News Live,Digital Desk : देश की राजनीति में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक होने के साथ-साथ बेहद गहमागहमी भरा रहा। भारी उम्मीदों के बीच लाया गया महिला आरक्षण विधेयक 2026 लोकसभा की दहलीज पार नहीं कर सका। सदन में सरकार के पास साधारण बहुमत तो था, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 'विशेष बहुमत' के अभाव में यह महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को भी हार का सामना करना पड़ा।
वोटों का गणित: क्यों फेल हो गया विधेयक?
लोकसभा में मतदान के दौरान कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकार को समर्थन तो मिला, लेकिन वह दो-तिहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी।
| श्रेणी | वोटों की संख्या |
|---|---|
| पक्ष में वोट (सरकार) | 298 |
| विपक्ष में वोट (INDIA गठबंधन) | 230 |
| कुल मतदान | 528 |
नियम क्या कहता है? संविधान संशोधन (131वां संशोधन) विधेयक को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता थी। इस लिहाज से 528 सदस्यों में से विधेयक को पास कराने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार केवल 298 वोट ही जुटा पाई।
लोकसभा अध्यक्ष का बड़ा फैसला
मतदान के नतीजे आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने सदन को सूचित किया, "यह संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका है, इसलिए इस पर आगे कोई कार्रवाई करना संभव नहीं है।" इसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
परिसीमन पर अमित शाह की दलील: '49 लाख मतदाताओं का एक सांसद कैसे सुने?'
विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन (Delimitation) की आवश्यकता पर जोर देते हुए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में निर्वाचन क्षेत्रों में भारी असमानता है।
उन्होंने सवाल उठाया, "देश में कुछ निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां 49 लाख मतदाता हैं, जबकि कुछ में केवल 60,000। क्या कोई मुझे समझा सकता है कि 49 लाख मतदाताओं वाला एक सांसद अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे कर पाएगा? मतदाताओं को अपने प्रतिनिधि से मिलने और उम्मीदें रखने का हक है। इसीलिए संविधान समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान करता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलन बना रहे।"
विपक्ष की आपत्तियां और पीएम की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर महिला शक्ति के सम्मान में इस विधेयक का समर्थन करने की भावुक अपील की थी। हालांकि, विपक्ष ने परिसीमन की शर्तों और आरक्षण लागू करने की समयसीमा को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं। विपक्ष का तर्क था कि सरकार आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसे लटकाना चाहती है। लंबी बहस और हंगामे के बीच अंततः विपक्ष ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया, जिससे यह प्रस्ताव गिर गया।