रामनवमी और महानवमी की तारीख को लेकर भारी कन्फ्यूजन! क्या 26 मार्च को ही है प्रभु राम का जन्मोत्सव? पंचांग के फेर में उलझे भक्त...

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India News Live,Digital Desk : चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का समापन करीब है और इसी के साथ रामनवमी व महानवमी की तिथियों को लेकर भक्तों के बीच एक बड़ा संशय खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और धार्मिक चर्चाओं में इस बात को लेकर पहेली बनी हुई है कि क्या इस साल 26 मार्च को ही रामनवमी मनाई जाएगी? पंचांग की गणना और तिथियों के घटने-बढ़ने (क्षय तिथि) के कारण आए इस उलटफेर ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। हर कोई यह जानना चाहता है कि कन्या पूजन और प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव आखिर किस दिन शास्त्र सम्मत तरीके से मनाया जाएगा। अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं ज्योतिष गणना के अनुसार एकदम सटीक तारीख।

पंचांग का गणित और तिथियों का उलटफेर: क्यों पैदा हुआ भ्रम?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कभी-कभी तिथियां सूर्योदय के समय शुरू होकर सूर्यास्त से पहले समाप्त हो जाती हैं या फिर अगले दिन तक खिंच जाती हैं। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि के मिलन को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कुछ पंचांगों के अनुसार नवमी तिथि 26 मार्च की मध्यरात्रि से लग रही है, तो कुछ में उदयातिथि का महत्व बताया जा रहा है। इसी तकनीकी कारण से लोग असमंजस में हैं कि महानवमी का उपवास और रामनवमी का उल्लास एक ही दिन होगा या अलग-अलग। भक्तों के लिए यह जानना जरूरी है कि शास्त्रोक्त विधि से उदयातिथि का ही सबसे अधिक महत्व होता है।

26 मार्च या 27 मार्च? यहाँ जानें कन्या पूजन और रामनवमी की सही डेट

ज्योतिष विशेषज्ञों और कर्मकांड के विद्वानों के अनुसार, इस साल महानवमी और रामनवमी की तिथियों का संयोग बेहद खास बन रहा है। यदि नवमी तिथि 26 मार्च को सूर्योदय के बाद लग रही है और दोपहर के समय (जब भगवान राम का जन्म हुआ था) मौजूद है, तो उसी दिन रामनवमी मनाना श्रेष्ठ होगा। हालांकि, कन्या पूजन के लिए कई लोग अष्टमी युक्त नवमी को शुभ मानते हैं। पंचांग के अनुसार, महानवमी का व्रत और हवन 26 मार्च को किए जाने की संभावना है, जबकि प्रभु राम का जन्मोत्सव यानी रामनवमी का मुख्य उत्सव भी इसी के इर्द-गिर्द मनाया जाएगा। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग और उदयातिथि के समय का विशेष ध्यान रखें।

महानवमी पर सिद्धि योग का संयोग: कैसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा?

नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। इस दिन हवन और कन्या पूजन का विशेष महत्व है। यदि आप भी 26 मार्च को नवमी मना रहे हैं, तो सुबह जल्दी स्नान करके मां की आराधना करें और नौ कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें। रामनवमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। अयोध्या समेत पूरे देश में इस दिन का विशेष उल्लास रहता है। पंचांग के इस उलटफेर के बीच, भक्ति और श्रद्धा सबसे ऊपर है। सही मुहूर्त में किया गया पूजन और दान-पुण्य जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है।