The "Yuva Sathi" scheme is a hit in Bengal: 30 लाख का था लक्ष्य, उमड़ पड़े 81 लाख बेरोजगार; अब ममता सरकार के सामने 'वेरिफिकेशन' की बड़ी चुनौती
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गई बेरोजगारी भत्ता योजना 'युवा साथी' ने उम्मीदों के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। राज्य सरकार ने शुरुआती दौर में करीब 30 लाख युवाओं के जुड़ने का अनुमान लगाया था, लेकिन आवेदन प्रक्रिया खत्म होने तक यह आंकड़ा ढाई गुना से भी ज्यादा यानी 81 लाख के पार पहुंच गया है। आवेदनों की इस 'सुनामी' ने अब प्रशासन की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर डेटा की जांच करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
हर दिन आए 8 लाख आवेदन, युवाओं में जबरदस्त उत्साह
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 15 फरवरी से शुरू हुई इस योजना को लेकर बंगाल के युवाओं में जबरदस्त क्रेज देखा गया। आलम यह था कि रोजाना औसतन 8 लाख आवेदन पोर्टल पर जमा हुए। आवेदन शुरू होने के महज एक हफ्ते के भीतर ही यह संख्या 45 लाख को पार कर गई थी। इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के शिक्षित बेरोजगारों को सरकार की ओर से हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दी जानी है।
1 अप्रैल से मिलना है भत्ता, बजट बना सिरदर्द
योजना के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को 1 अप्रैल से उनके बैंक खातों में सहायता राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। हालांकि, सरकार के पास वर्तमान बजटीय आवंटन के हिसाब से केवल 27.8 लाख आवेदकों को ही भत्ता देने की गुंजाइश है। अब सवाल यह उठ रहा है कि 81 लाख आवेदकों में से इन चुनिंदा लाभार्थियों का चयन कैसे होगा? सरकार अब 'फिल्ट्रेशन' की प्रक्रिया अपनाएगी ताकि केवल सबसे जरूरतमंद और पात्र युवाओं तक ही यह लाभ पहुंच सके।
सत्यापन के लिए बनेगा 'स्पेशल टास्क फोर्स' जैसा तंत्र
आवेदनों की बाढ़ को देखते हुए राज्य सरकार एक बेहद मजबूत और पारदर्शी सत्यापन (Verification) तंत्र तैयार कर रही है। इसमें आवेदकों की शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और रोजगार की स्थिति की गहनता से जांच की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की धांधली न हो और अंतिम सूची पूरी तरह त्रुटिहीन रहे। पात्र युवाओं की छंटनी के बाद ही फाइनल बेनेफिशियरी लिस्ट जारी की जाएगी।