8th Pay Commission: DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की उठी मांग, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

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India News Live,Digital Desk : 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशियों भरी खबर आ रही है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजकर मांग की है कि वर्तमान 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को तत्काल प्रभाव से कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Salary) में शामिल यानी 'मर्ज' कर दिया जाए।

इस मांग के पीछे का सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ वर्षों में खाद्य वस्तुओं, ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू होती हैं, तब तक महंगाई से राहत देने के लिए इसे 'अंतरिम राहत' के रूप में दिया जाना चाहिए।

वेतन संरचना में होगा 'बड़ा धमाका': कैसे बदल जाएगी आपकी सैलरी?

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो इसका असर केवल डीए पर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों को मिलने वाले तमाम अन्य भत्तों पर भी पड़ेगा। दरअसल, केंद्र सरकार के अधिकांश भत्ते (Allowances) बेसिक सैलरी के प्रतिशत के आधार पर तय होते हैं।

इन भत्तों पर पड़ेगा सीधा असर:

मकान किराया भत्ता (HRA): बेसिक सैलरी बढ़ने पर एचआरए की राशि भी स्वतः बढ़ जाएगी।

ग्रेच्युटी और PF: भविष्य निधि और ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, जिससे रिटायरमेंट फंड में बड़ी बढ़ोत्तरी होगी।

परिवहन भत्ता (TA): यात्रा भत्ते पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

गणित समझें: कितनी बढ़ेगी आपकी टेक-होम सैलरी?

इसे एक साधारण उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी कर्मचारी की वर्तमान स्थिति कुछ ऐसी है:

मदवर्तमान स्थितिDA मर्ज होने के बाद (प्रस्तावित)
मूल वेतन (Basic Pay)₹30,000₹45,000
महंगाई भत्ता (DA 50%)₹15,000₹0 (मर्ज हो गया)
नया मूल वेतन-₹45,000

फायदा क्या होगा? जब अगली बार महंगाई भत्ते में 4% की वृद्धि होगी, तो इसकी गणना पुराने ₹30,000 के बजाय नए ₹45,000 पर की जाएगी। यानी ₹1,200 की जगह सीधे ₹1,800 की बढ़ोत्तरी होगी।

पेंशनभोगियों के लिए भी बड़ी राहत

यह प्रस्ताव केवल नौकरीपेशा लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि 69 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए भी खुशखबरी है। पेंशन की गणना भी संशोधित मूल वेतन के आधार पर की जाएगी, जिससे बुजुर्गों को महंगाई के इस दौर में अधिक वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी।

क्या कहता है पुराना रिकॉर्ड?

इससे पहले के वेतन आयोगों में भी यह परंपरा रही है कि जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर जाता है, तो उसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाता है। इसी ऐतिहासिक तर्क को आधार बनाकर कर्मचारी संगठन अब सरकार पर दबाव बना रहे हैं। फिलहाल, गेंद सरकार के पाले में है और लाखों नजरें न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग के फैसले पर टिकी हैं।