ईरान युद्ध का साया: सालों तक भुगतेगी दुनिया, गहराएगा 'महा-खाद्य संकट'; एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी की डरावनी चेतावनी

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India News Live,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग को भले ही अभी 40 दिन बीते हों, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम पूरी मानव जाति के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं होने वाले हैं। अंतरराष्ट्रीय और सामरिक मामलों के दिग्गज विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने दावा किया है कि इस युद्ध का असर केवल कुछ महीनों नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों तक रहेगा। चेलानी के अनुसार, यह संकट 1970 के दशक के वैश्विक तेल संकट से भी कहीं अधिक विनाशकारी साबित होने वाला है।

70 के दशक से भी बुरा हाल: अर्थव्यवस्था और भोजन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

डॉ. चेलानी ने 'NIKKEI ASIA' के माध्यम से दुनिया को आगाह किया है कि आधुनिक इतिहास में यह आधी सदी का सबसे प्रभावशाली और घातक युद्ध है।

खतरे में भारत: यूएन (UN) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यदि यह युद्ध और खिंचा, तो भारत में 25 लाख नए गरीब बढ़ सकते हैं।

खाद्य तंत्र का टूटना: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने न केवल तेल की सप्लाई रोकी है, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखला (Food Supply Chain) को भी छिन्न-भिन्न कर दिया है। चेलानी का मानना है कि अगर आज युद्ध रुक भी जाए, तो व्यवस्था को पटरी पर आने में कई साल लगेंगे।

अमेरिका की 'दोगली' नीति: एक तरफ ईरान से जंग, दूसरी तरफ पाक पर प्यार

चेलानी ने अमेरिका की विदेश नीति पर तीखा प्रहार करते हुए इसे विरोधाभासों से भरा बताया है।

परमाणु मुद्दा: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना सारा यूरेनियम भंडार उसे सौंप दे और ऊर्जा के लिए भी परमाणु संवर्धन न करे।

पाकिस्तान का विरोधाभास: दूसरी ओर, पाकिस्तान खुलकर परमाणु हथियार विकसित कर रहा है और आतंकवाद को पनाह दे रहा है, फिर भी वह अमेरिका का 'लाडला' बना हुआ है।

मुनीर-ट्रंप केमिस्ट्री: चेलानी ने तंज कसते हुए कहा कि जहाँ ईरान को अलोकतांत्रिक बताकर कुचला जा रहा है, वहीं पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच करते हैं और ट्रंप उनकी तारीफों के पुल बांधते हैं।

क्या था 2015 का परमाणु समझौता?

ब्रह्मा चेलानी ने याद दिलाया कि 2015 में बराक ओबामा के समय ईरान के साथ परमाणु डील हुई थी, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में अमान्य कर दिया था। अब ट्रंप की शर्त और भी कठिन है—वे चाहते हैं कि ईरान हथियारों के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद कर दे।

एनुअल थ्रेट असेसमेंट और हकीकत

अमेरिकी रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि चीन, रूस, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान से उसे खतरा है। इसके बावजूद पाकिस्तान के प्रति ट्रंप का नरम रुख वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। चेलानी के अनुसार, अलोकतांत्रिक देशों के प्रति अमेरिका की यह 'सिलेक्टिव' नीति ही भविष्य के बड़े संकटों की जड़ है।