Strait of Hormuz: 'परमाणु बम' से कम नहीं होर्मुज की घेराबंदी; पूर्व US जनरल ने बताया इसे खोलना क्यों है असंभव

Post

India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। नाटो (NATO) के पूर्व सुप्रीम अलाइड कमांडर और अमेरिकी सेना के पूर्व जनरल वीसली क्लार्क ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के लिए होर्मुज किसी परमाणु हथियार से कम नहीं है। क्लार्क के मुताबिक, अमेरिका के पास इसे बलपूर्वक खोलने का कोई आसान सैन्य विकल्प नहीं बचा है।

"1980 का 'टैंकर वॉर' नहीं, यह पूरी तरह अलग है"

सीएनएन (CNN) को दिए इंटरव्यू में क्लार्क ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका होर्मुज को जबरन खोलने की कोशिश करता है, तो यह अभियान बेहद लंबा और महंगा साबित होगा। उन्होंने कहा, "यह 1980 के दशक का टैंकर युद्ध नहीं है। आज का ईरान पूरी तरह तैयार है और उसके पास अत्याधुनिक रक्षा तकनीक है। इसे खोलना अमेरिका के लिए 'दहकती आग' में कूदने जैसा होगा।"

ईरान की 'किलेबंदी' और चीनी तकनीक का गठजोड़

क्लार्क ने होर्मुज की भौगोलिक स्थिति और ईरान की तैयारी पर रोशनी डालते हुए इसे एक 'अभेद्य किला' बताया:

रणनीतिक बढ़त: होर्मुज के एक तरफ ईरान की ऊंची पहाड़ियां हैं, जहां से ईरानी सेना पूरे रास्ते पर रियल-टाइम नजर रखती है।

खतरनाक हथियार: समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines), तेज रफ्तार सुसाइड बोट्स और आधुनिक चीनी तकनीक से लैस मिसाइलें इस संकरे रास्ते को अमेरिकी नौसेना के लिए मौत का जाल बना सकती हैं।

ड्रोन की शक्ति: आज के दौर में ईरान के पास उन्नत ड्रोन तकनीक है, जो उसे इस जलमार्ग पर बिना किसी बड़े जहाजी बेड़े के भी दबदबा बनाए रखने की ताकत देती है।

ट्रंप का 'आसान' रास्ता: सैन्य कार्रवाई से परहेज?

पूर्व जनरल का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस खतरे को समझते हैं। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन अपने सैनिकों को जमीन पर भेजने या अपने महंगे युद्धपोतों को ईरानी मिसाइलों की जद में लाने के बजाय 'ब्लाकेड' (नाकेबंदी) का रास्ता चुन रहा है। अमेरिका ने ओमान से लेकर पाकिस्तान-ईरान सीमा तक जो नाकेबंदी की है, वह ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का एक प्रभावी लेकिन कम जोखिम भरा तरीका है।

क्या बिना ईरान की मर्जी के खुल पाएगा रास्ता?

होर्मुज का सच यह है कि 28 फरवरी (जब यह संकट शुरू हुआ) के बाद से ईरान ने केवल 2-3 जहाजों पर कार्रवाई की, जिसके डर से पूरी दुनिया की शिपिंग कंपनियां सहम गईं। क्लार्क के अनुसार, जब तक ईरान बातचीत की मेज पर किसी ठोस समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक इस रास्ते को सुरक्षित रखना लगभग नामुमकिन है। वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए, होर्मुज फिलहाल तेहरान का सबसे बड़ा 'बार्गेनिंग चिप' (सौदेबाजी का हथियार) बना हुआ है।