US-Iran Conflict: ट्रंप ने दी बमबारी की धमकी, तो ईरान ने 'युद्ध के नए पत्तों' से चेताया; पाकिस्तान वार्ता अधर में
India News Live,Digital Desk : पाकिस्तान के इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही खटाई में पड़ती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बमबारी' वाली चेतावनी पर ईरान ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। तेहरान ने दोटूक कहा है कि धमकियों के साये में कोई बातचीत संभव नहीं है। इस जुबानी जंग ने बुधवार को खत्म हो रहे 14 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
"आत्मसमर्पण की मेज नहीं बनेगी बातचीत"
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गलीबाफ ने ट्रंप को कड़ा जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप घेराबंदी और युद्धविराम के उल्लंघन के जरिए वार्ता की मेज को 'आत्मसमर्पण की मेज' बनाना चाहते हैं। गलीबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा, "हम दबाव में बातचीत स्वीकार नहीं करते। पिछले दो हफ्तों में हमने युद्ध के मैदान के लिए अपने 'नए पत्ते' खोलने की पूरी तैयारी कर ली है।"
ईरान का इनकार: "फिलहाल बातचीत की कोई योजना नहीं"
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर सीजफायर के उल्लंघन और ओमान सागर में ईरानी व्यापारिक जहाज पर हमले का आरोप लगाते हुए इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया। बगई ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यूरेनियम संवर्धन और रक्षा रणनीतियों जैसे संप्रभु मुद्दों पर ईरान किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप के तेवर: "डील नहीं तो होगी भारी बमबारी"
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी आक्रामक शैली अपनाई है। पीबीएस न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरान को पाकिस्तान में वार्ता के लिए मौजूद रहना चाहिए। साथ ही, उन्होंने एक घातक चेतावनी भी दे दी कि यदि युद्धविराम की समयसीमा (22 अप्रैल) समाप्त होने तक कोई ठोस डील नहीं होती है, तो ईरान पर भारी बमबारी की जाएगी। ब्लूमबर्ग से बातचीत में ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि वह सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
होर्मुज और मध्यस्थता पर संशय
इस पूरे विवाद के बीच 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर लगा प्रतिबंध व्यापारिक जहाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पाकिस्तान इस वार्ता के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास ने इस्लामाबाद की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा को लेकर बना सस्पेंस भी इस कूटनीतिक गतिरोध को और बढ़ा रहा है।
अब दुनिया की नजरें बुधवार की डेडलाइन पर टिकी हैं। यदि कूटनीति विफल रहती है, तो 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' जैसे सैन्य विकल्प पश्चिम एशिया को एक भीषण युद्ध की आग में झोंक सकते हैं।