'दिल के झरोखे में...' हसरत जयपुरी की वह अमर रचना, जिसे गाते समय शम्मी कपूर ने क्यों झिझक दिखाई थी?

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India News Live,Digital Desk : हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में गीतकार हसरत जयपुरी के लिखे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों को छू लेते हैं। फिल्म 'ब्रह्मचारी' का कालजयी गाना 'दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर...' केवल एक गीत नहीं, बल्कि हसरत जयपुरी के उस अधूरे प्यार की दास्तान है, जिसे उन्होंने अपनी प्रेमिका की शादी के दिन लिखा था।

प्रेमिका की शादी और गीतों का जन्म

हसरत जयपुरी अपनी पड़ोस में रहने वाली एक हिंदू युवती, 'राधा' से बेहद प्यार करते थे। उस दौर में पत्र और आंखों के इशारों से होने वाला यह प्यार धर्म की दीवारों के आगे बिखर गया। हसरत अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाए। जब राधा की शादी हो रही थी, तब हसरत जयपुरी ने अपने दर्द को कागज पर उतार दिया। उन्होंने लिखा:

"दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर,

यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर,

रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास..."

हसरत जयपुरी की कलम से केवल यही नहीं, बल्कि 'ब्रह्मचारी' का ही एक और सुपरहिट गाना— 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना'— भी उसी अधूरी प्रेम कहानी की देन था, जो उन्होंने अपनी जवानी के दिनों में राधा के लिए लिखा था।

शम्मी कपूर क्यों नहीं गा पा रहे थे यह गाना?

इस गाने की शूटिंग से जुड़ा एक बेहद भावुक किस्सा है, जिसका जिक्र मशहूर लेखक मनोज मुंतशिर ने एक रियलिटी शो में किया था। फिल्म की सिचुएशन के अनुसार, शम्मी कपूर को यह गाना फिल्म में एक गंभीर स्थिति में फिल्माना था।

शम्मी कपूर ने जब पहली बार यह गाना सुना, तो वे गहरे इमोशन्स में डूब गए। वे इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू गिरने लगे। शम्मी कपूर ने शुरुआत में यह गाना गाने से मना कर दिया और कहा, "प्लीज इसे बदल दो, मैं इस गाने को गाते समय अपने आंसू नहीं रोक पाऊंगा।" उन्हें लग रहा था कि यदि वे इस गाने की गहराई और दर्द में उतर गए, तो शूटिंग के दौरान कैमरा के सामने खुद को संभालना उनके लिए नामुमकिन हो जाएगा। बाद में, पूरी टीम के समझाने पर और खुद पर काबू पाकर उन्होंने इसे सिनेमा जगत के सबसे यादगार गानों में से एक बना दिया।

हसरत जयपुरी की कलम ने उस दर्द को एक ऐसी खूबसूरती दी कि वह आज भी करोड़ों प्रेमियों का पसंदीदा गीत बना हुआ है। यह गाना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति का व्यक्तिगत दुख, कालजयी कलाकृति में बदलकर अमर हो जाता है।