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October 14 2026 03:20 pm

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की पोलावारम याचिका खारिज की, कहा नया मुक़दमा दायर करें

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India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की पोलावारम मल्टीपर्पज़ इरिगेशन परियोजना (Polavaram Project) के विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका को आज खारिज (dispose/dismiss) कर दिया है। तेलंगाना ने यह याचिका Article 32 के तहत दाख़िल की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश की तरफ़ से गोदावरी नदी के पानी का अनधिकृत उपयोग या अनुपात से अधिक पानी का स्थानांतरण किया जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला प्रत्यक्ष विवादित स्थितियों से जुड़ा है, जिसमें सिर्फ एक राज्य को पक्ष में रखकर writ petition दाख़िल करना सही रास्ता नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के इंटर‑स्टेट पानी विवाद को सभी संबंधित पक्षों — जैसे कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक — को शामिल करके एक आम अदालतीन मुक़दमे (मुख्य रूप से Article 131 के तहत) में सुलझाया जाना चाहिए।

इसके चलते याचिका को इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि इसे “जिम्मेदार तरीके से” सभी पक्षों के समक्ष पेश नहीं किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना को यह स्वतंत्रता (liberty) दी है कि वह उसी मुद्दे पर एक नई मुक़दमा दायर कर सकता है, जिसमें सभी प्रभावित राज्यों को पक्ष बनाया जाए और विवाद औपचारिक तरीके से सुलझाया जाए।

मामलो की पृष्ठभूमि

तेलंगाना का कहना है कि आंध्र प्रदेश पोलावारम–नल्लमल्ला सागर लिंक परियोजना (Polavaram/Banakacherla/Nallamala Sagar Link Project) के लिए गोदावरी नदी के पानी का 200 TMC तक तक़रीबन अधिक उपयोग करना चाहता है, जो कि पहले तय Godavari Water Disputes Tribunal Award या जल‑विभाजन समझौतों के खिलाफ है। तेलंगाना के वकीलों ने कोर्ट से इस पर रोक लगाने का आग्रह किया था।

कोर्ट ने इस धारणा पर गंभीर सवाल उठाए कि यह मामला सिर्फ़ एक राज्य का निजी विधिक विवाद नहीं, बल्कि एक राज्यों के बीच का पानी‑साझा विवाद है, जिसे Article 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट की मूल अधिकारिता में दायर मुक़दमे के रूप में देखा जाना चाहिए।

अब तेलंगाना सरकार के पास यह विकल्प है कि वे एक नया मुक़दमा दायर करें, जिसमें सभी हितधारक राज्यों को पक्ष बनाया जाए, और इस डुबते व पानी‑साझा विवाद को अदालत के सामने विस्तृत तौर पर पेश किया जा सके।