तालिबान का क्रूर चेहरा: हेरात में महिलाओं पर चादर-बुर्के की सख्ती, हाथ में चाबुक लिए सड़कों पर उतरी 'नैतिकता पुलिस'
हेरात/काबुल। अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान शासन ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों और उनकी आजादी पर अब तक का सबसे दमनकारी प्रहार किया है। पश्चिमी अफगानिस्तान के प्रमुख ऐतिहासिक शहर हेरात में तालिबान के 'नैतिकता प्रचार एवं दुराचार निवारण मंत्रालय' (PVPV) की सशस्त्र टीमों ने महिलाओं पर बेहद कड़ा और अनिवार्य ड्रेस कोड थोपने के लिए सड़कों पर एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। हाथ में कोड़े (चाबुक) और आधुनिक हथियार लिए तालिबान के कारिंदे सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को प्रताड़ित कर रहे हैं, जिससे पूरे शहर में दहशत और हड़कंप का माहौल है।
चादर-बुर्का न पहनने पर वैन में ठूंस रही पुलिस, चश्मदीदों ने बयां किया खौफ
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) से बात करते हुए स्थानीय निवासियों और पीड़ित महिलाओं ने तालिबान की इस बर्बरता की दर्दनाक दास्तां बयां की है:
चाबुक का खौफ: एक 23 वर्षीय स्थानीय महिला ने बताया कि सड़कों पर तालिबान के अधिकारी खुलेआम चाबुक लेकर घूम रहे हैं। उन्होंने ऐसी महिलाओं को जबरन सरकारी वैन में ठूंस दिया जिन्होंने पारंपरिक 'चादर' नहीं ओढ़ी थी, भले ही वे महिलाएं पहले से हिजाब, नकाब और अबाया (पूरा शरीर ढकने वाला ढीला वस्त्र) पहने हुई थीं।
वाहनों की तलाशी: एक अन्य 27 वर्षीय चश्मदीद महिला के मुताबिक, नैतिकता पुलिस के सशस्त्र जवान हर बस, टैक्सी और निजी कार को रोककर अंदर बैठी महिलाओं की पोशाक की जांच कर रहे हैं। जांच के नाम पर महिलाओं से तीखे सवाल किए जा रहे हैं और जरा सी कमी पाए जाने पर उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जा रहा है।
सड़कों से गायब हुईं महिलाएं, टैक्सी ड्राइवरों को भी सख्त हिदायत
तालिबान के इस दमनकारी अभियान के शुरू होते ही हेरात शहर में महिलाओं की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। डर के मारे महिलाओं ने खुद को घरों में कैद कर लिया है। एक 20 वर्षीय टैक्सी ड्राइवर ने बताया, "बाजारों और सड़कों पर अब महिलाएं न के बराबर दिख रही हैं। हमें तालिबान प्रशासन से सख्त आदेश मिला है कि बिना चादर-बुर्के वाली किसी भी महिला को गाड़ी में न बैठाएं। यदि हम ऐसा करते हैं, तो हमारे खिलाफ भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने जताई गहरी चिंता, तालिबान बोला- 'यह अल्लाह का कानून'
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सहायता मिशन (UNAMA) ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। यूएनएएमए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ड्रेस कोड के बहाने हेरात में कई महिलाओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर हिरासत में रखा गया है, जो मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान से महिलाओं के मौलिक अधिकारों का सम्मान करने और इन गिरफ्तारियों को तुरंत रोकने की अपील की है।
वहीं दूसरी ओर, तालिबान के पीवीपीवी मंत्रालय ने इन गिरफ्तारियों पर सीधे कुछ भी कहने से इनकार कर दिया, लेकिन अपने कदम को जायज ठहराते हुए कहा, "हेरात में कुछ भी असामान्य या नया नहीं हो रहा है। महिलाओं के लिए तय ड्रेस कोड अल्लाह का आदेश और देश का कानून है। इसे जमीन पर लागू करना हमारा धार्मिक, नैतिक और कानूनी कर्तव्य है।"
90 के दशक के काले दौर में लौटा अफगानिस्तान
अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के बाद से तालिबान महिलाओं के अधिकारों को धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म कर चुका है।
महिलाओं की उच्च शिक्षा और स्कूल-कॉलेज जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
महिलाओं के नौकरी करने, सार्वजनिक पार्कों, रेस्टोरेंट और जिम में जाने पर पूरी तरह रोक है।
किसी भी महिला को बिना 'महरम' (पुरुष रिश्तेदार) के लंबी यात्रा करने की अनुमति नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की यह सख्त और कट्टरपंथी नीतियां महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह बेदखल कर घरों की चारदीवारी में कैद करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। तालिबान का यह रवैया दुनिया को 1990 के दशक के उसके पहले शासन काल के काले दौर की याद दिला रहा है।