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September 09 2026 06:35 pm

State budgets under pressure : 70% खर्च वेतन-पेंशन और सब्सिडी पर, विकास योजनाओं के लिए सिर्फ 30% फंड बचा

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India News Live,Digital Desk : देश के ज़्यादातर राज्य सरकारें इस समय आर्थिक दबाव में हैं। उनका करीब 70 प्रतिशत बजट वेतन, पेंशन, सब्सिडी और कर्ज़ के ब्याज के भुगतान में खर्च हो जाता है। ऐसे में विकास परियोजनाओं और जनहित योजनाओं के लिए सिर्फ 30 प्रतिशत राशि ही बचती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में राज्यों की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जब राज्य विकास परियोजनाओं पर कम खर्च करते हैं, तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक वृद्धि दर पर पड़ता है। कई राज्यों की हालत इतनी खराब है कि उन्हें नियमित सरकारी कामकाज के लिए भी कर्ज़ लेना पड़ रहा है।

बढ़ती आबादी और घटता निवेश

बढ़ती आबादी के साथ स्कूल, अस्पताल और बुनियादी ढांचे का विस्तार होना चाहिए। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है।
राज्य सरकारें अब सीधे कैश ट्रांसफर योजनाओं (Direct Cash Transfer) पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं, क्योंकि इससे उन्हें राजनीतिक फायदा मिलता है। लेकिन सवाल उठता है — क्या यह लाभ आम जनता की मूलभूत सुविधाओं की कीमत पर हो रहा है?

कैश ट्रांसफर बनाम विकास

अगर राज्य सरकारें अपने बजट का बड़ा हिस्सा नकद सहायता देने में ही खर्च कर देंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन जैसी ज़रूरी सेवाओं के लिए पैसे कहां से आएंगे?
आख़िरकार, इसका असर नागरिकों के जीवनस्तर और राज्य की दीर्घकालिक विकास क्षमता दोनों पर पड़ेगा।

क्या है ‘प्रतिबद्ध खर्च’?

‘प्रतिबद्ध खर्च’ (Committed Expenditure) वह राशि होती है, जो सरकार पहले से तय कर चुकी होती है और जिसे घटाया नहीं जा सकता।
इसमें शामिल हैं —

  • सरकारी कर्मचारियों का वेतन,
  • पेंशन का भुगतान, और
  • कर्ज़ पर ब्याज की अदायगी।

यानी बजट का यह हिस्सा पहले से बंधा हुआ होता है और सरकार के पास इसके अलावा बची राशि ही विकास के कामों में लग सकती है।

राज्यों का बढ़ता कर्ज़ बोझ

एफआरबीएम समीक्षा समिति ने तय किया था कि केंद्र सरकार का डेट-टू-जीडीपी रेशियो 40 प्रतिशत और राज्यों का 20 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।
लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों की औसत उधारी जीएसडीपी का 27.2 प्रतिशत पहुंच गई है — यानी सीमा से काफी ऊपर।

राज्यों में चुनावी वादों और मुफ्त योजनाओं की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए माना जा रहा है कि यह कर्ज़ बोझ आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

वित्तीय अनुशासन की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों को वित्तीय अनुशासन अपनाने की ज़रूरत है। मुफ्त योजनाओं के बजाय अगर बजट का उपयोग स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़कें और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जाए, तो इससे आम जनता को स्थायी लाभ मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी।