Sri Krishna Janmashtami 2025 : व्रत, पूजा और आध्यात्मिक अनुशासन के संपूर्ण नियम
- by Priyanka Tiwari
- 2025-08-13 16:08:00
India News Live,Digital Desk : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन उत्सव इस वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग की भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, मध्यरात्रि के समय भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। यह पर्व केवल व्रत और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और आंतरिक शुद्धि का एक महत्वपूर्ण साधन है।
संकल्प का महत्व
जन्माष्टमी व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लेना आवश्यक है। सुबह स्नानादि के बाद भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष मन ही मन प्रण करना चाहिए—कि व्रत पूर्ण निष्ठा, पवित्रता और श्रद्धा से किया जाएगा। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक साधना का वचन है।
व्रत के प्रमुख प्रकार
निर्जला व्रत – व्रत तोड़ने तक एक बूंद पानी भी न पीना।
फलाहार व्रत – फल, दूध, सूखे मेवे और व्रत के लिए बने व्यंजन ग्रहण करना।
आंशिक उपवास – दिन में एक बार भोजन, जिसमें अनाज और सामान्य नमक का उपयोग न हो।
उपवास के नियम
गेहूं, चावल, दाल जैसे अन्न का सेवन न करें।
तामसिक खाद्य (लहसुन, प्याज) से परहेज करें।
सैंधव नमक का प्रयोग शुभ माना जाता है।
पूजा-भोजन में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
बासी भोजन न खाएं, केवल ताजा प्रसाद ही ग्रहण करें।
व्रत के दौरान क्रोध, ईर्ष्या, लोभ से दूर रहें।
श्रीकृष्ण मंत्रों का जाप, भगवद्गीता का पाठ और भजन-कीर्तन करें।
मध्यरात्रि पूजन और व्रत समाप्ति
भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ, इसलिए इसी समय उनका विशेष अभिषेक किया जाता है। बाल गोपाल को दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराकर रेशमी वस्त्र, आभूषण और मोरपंख से सजाया जाता है। इसके बाद झूला-झुलाने, भजन-कीर्तन और आरती के साथ उत्सव चरम पर पहुँचता है। अंत में मक्खन-चीनी का प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया जाता है।