करोड़ों फूंके पर बॉक्स ऑफिस पर हुईं ढेर: पानी की तरह बहाया गया था पैसा
भारतीय सिनेमा में अक्सर यह माना जाता है कि अगर फिल्म में सुपरस्टार्स की फौज हो, विदेशी लोकेशंस पर शूटिंग हो और वीएफएक्स (VFX) पर अंधाधुंध पैसा खर्च किया जाए, तो फिल्म का हिट होना तय है। लेकिन बॉक्स ऑफिस का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जब तक कहानी में दम न हो, दर्शक किसी भी तड़क-भड़क को स्वीकार नहीं करते। बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में बनी हैं जिनके निर्माण में निर्माताओं ने अपनी पूरी पूंजी झोंक दी, पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन रिलीज के बाद दर्शकों ने उन्हें इस कदर नकार दिया कि वे इतिहास की सबसे बड़ी डिजास्टर साबित हुईं। इन फिल्मों के फ्लॉप होने से न केवल प्रोडक्शन हाउसेज को सैकड़ों करोड़ का घाटा हुआ, बल्कि कई मेकर्स दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए।
सिनेमा के इतिहास में दर्ज उन पांच चर्चित और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों पर एक नजर डालते हैं, जिनकी असफलता ने पूरे बॉलीवुड को हिलाकर रख दिया था।
1. आदिपुरुष (Adipurush): ₹600 करोड़ का मेगा बजट और भारी फजीहत
रामायण की अमर गाथा पर आधारित ओम राउत की फिल्म 'आदिपुरुष' को भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में से एक के रूप में प्रचारित किया गया था। प्रभास, कृति सेनन और सैफ अली खान जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म का बजट लगभग ₹500 से ₹600 करोड़ बताया गया था।
मेकर्स ने हॉलीवुड स्तर के वीएफएक्स और 3D तकनीक का दावा कर पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो इसके बेहद घटिया विजुअल्स, अजीबोगरीब कैरेक्टर डिजाइन और सड़कछाप डायलॉग्स को लेकर देश भर में भारी आक्रोश फैल गया। पहले वीकेंड के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह क्रैश हो गई और अपने भारी बजट की लागत तक नहीं निकाल पाई। वितरकों और निर्माताओं को इस फिल्म से करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा।
2. ठग्स ऑफ हिंदोस्तान (Thugs of Hindostan): ₹300 करोड़ की लागत और आमिर-अमिताभ की जोड़ी भी फेल
यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज था, क्योंकि पहली बार सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक साथ स्क्रीन शेयर कर रहे थे। फिल्म के लिए समुद्र में विशालकाय पानी के जहाज बनवाए गए, भारी कॉस्ट्यूम और इंटरनेशनल स्टंट डायरेक्टर्स पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। फिल्म का बजट करीब ₹300 करोड़ था।
रिलीज के पहले दिन तो फिल्म ने ₹50 करोड़ से ज्यादा की रिकॉर्ड ओपनिंग ली, लेकिन कमजोर पटकथा और 'पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन' की सस्ती नकल होने के कारण दूसरे ही दिन से दर्शकों ने सिनेमाघरों से दूरी बना ली। यह फिल्म अपने बजट का आधा हिस्सा भी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर नहीं वसूल सकी और आमिर खान को खुद सार्वजनिक रूप से दर्शकों से माफी मांगनी पड़ी थी।
3. बड़े मियां छोटे मियां (Bade Miyan Chote Miyan): ₹350 करोड़ का एक्शन धमाका हुआ फुस्स
अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ की जोड़ी को लेकर निर्देशक अली अब्बास जफर ने एक हाई-ऑक्टेन एक्शन फिल्म की योजना बनाई। जॉर्डन, यूके और अबू धाबी जैसी विदेशी लोकेशंस पर रियल स्टंट्स, गनफाइट्स और हॉलीवुड क्रू पर लगभग ₹350 करोड़ खर्च किए गए।
ईद के बड़े मौके पर रिलीज होने के बावजूद दर्शकों को फिल्म में आत्मा (Soul) और लॉजिक बिल्कुल नजर नहीं आया। बेजान कहानी और घिसे-पिटे एक्शन के कारण यह फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹65 करोड़ का आंकड़ा छूने के लिए भी तरस गई। इस फिल्म की ऐतिहासिक असफलता ने पूजा एंटरटेनमेंट को इतना गहरा आर्थिक झटका दिया कि कंपनी को अपने ऑफिस तक बेचने की नौबत आने की खबरें सुर्खियों में रहीं।
4. सम्राट पृथ्वीराज (Samrat Prithviraj): भव्य सेट्स और ₹200 करोड़ की बर्बादी
यशराज फिल्म्स के एक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'सम्राट पृथ्वीराज' के लिए दिल्ली और अजमेर के ऐतिहासिक शहरों के हूबहू विशाल सेट्स खड़े किए गए थे। लगभग ₹175 से ₹200 करोड़ के बजट में बनी इस ऐतिहासिक फिल्म में अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर मुख्य भूमिकाओं में थे।
हालांकि, रिलीज होते ही फिल्म को खराब कास्टिंग और कमजोर स्क्रीनप्ले के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। दर्शक अक्षय कुमार को अंतिम हिंदू सम्राट के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म मात्र ₹68 करोड़ के आसपास ही सिमट गई। निर्माता आदित्य चोपड़ा के लिए यह फिल्म एक बड़ा वित्तीय झटका साबित हुई।
5. बॉम्बे वेलवेट (Bombay Velvet): ₹120 करोड़ में बना रेट्रो बॉम्बे, मेकर्स के डूबे पैसे
अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 'बॉम्बे वेलवेट' का नाम बॉलीवुड के सबसे बड़े डिजास्टर्स में हमेशा ऊपर रहता है। 1960 के दशक के बॉम्बे को दोबारा जीवंत करने के लिए श्रीलंका में करोड़ों रुपये खर्च कर विशाल सेट्स बनाए गए थे। रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और करण जौहर जैसे बड़े नामों के बावजूद यह फिल्म दर्शकों के सिर के ऊपर से निकल गई।
लगभग ₹120 करोड़ की लागत से बनी यह फिल्म सिनेमाघरों में कुल ₹25 करोड़ भी नहीं कमा सकी थी। इस फिल्म की असफलता ने फॉक्स स्टार स्टूडियोज और फैंटम फिल्म्स को भारी नुकसान पहुंचाया और अनुराग कश्यप के करियर को भी बड़ा झटका लगा।
सबक: स्टार पावर नहीं, स्क्रिप्ट ही असली सिकंदर
इन सभी मेगा-बजट फ्लॉप्स ने फिल्म इंडस्ट्री को एक कड़ा सबक दिया है कि केवल पानी की तरह पैसा बहाने या बड़े चेहरों को स्क्रीन पर खड़ा कर देने से टिकट नहीं बिकते। वर्तमान समय में दर्शक समझदार हो चुके हैं; अगर कहानी में नयापन और भावनाएं नहीं हैं, तो ₹500 करोड़ का बजट भी फिल्म को गर्त में जाने से नहीं बचा सकता।