Spending hours on social media : जानिए दुनिया में और भारत में स्थिति
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-23 16:31:00
India News Live,Digital Desk : आज के समय में सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। लोग अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टिकटॉक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्क्रॉल करने, चैट करने या वीडियो देखने में बिताते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन से देश सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा समय बर्बाद करते हैं? एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों में लोग रोज़ाना 3 से 5 घंटे सिर्फ़ सोशल मीडिया पर बिताते हैं। आइए जानें शीर्ष देशों की सूची और भारत की स्थिति।
फ़िलीपींस
फ़िलीपींस वह देश है जहाँ लोग सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं। यहाँ के लोग रोज़ाना औसतन 4 घंटे 60 मिनट (करीब 5 घंटे) सोशल मीडिया पर बिताते हैं। यानी दिन का एक बड़ा हिस्सा वर्चुअल दुनिया में बीतता है।
सोशल मीडिया इस्तेमाल के मामले में कोलंबिया
दूसरे नंबर पर है। रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ के लोग रोज़ाना औसतन 3 घंटे 46 मिनट सोशल मीडिया पर बिताते हैं। यहाँ के उपयोगकर्ता चैटिंग और वीडियो कंटेंट पर काफ़ी समय बिताते हैं।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल में दक्षिण अफ्रीका
तीसरे स्थान पर है। यहाँ लोग औसतन 3 घंटे 43 मिनट प्रतिदिन सोशल मीडिया पर बिताते हैं। मनोरंजन और समाचार अपडेट के लिए यहाँ सोशल मीडिया सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है।
ब्राज़ील
के लोग सोशल मीडिया पर भी काफ़ी सक्रिय हैं। यहाँ के लोग औसतन प्रतिदिन 3 घंटे 41 मिनट सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बिताते हैं। ख़ासकर युवा लोग सोशल मीडिया को अपने संचार के मुख्य माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
सोशल मीडिया इस्तेमाल के मामले में अर्जेंटीना
पाँचवें स्थान पर है। यहाँ लोग प्रतिदिन औसतन 3 घंटे 26 मिनट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं। खेल और मनोरंजन सामग्री यहाँ सबसे लोकप्रिय सामग्री है।
भारत का स्थान:
इस सूची में भारत 14वें स्थान पर है। यहाँ लोग औसतन 2 घंटे 36 मिनट सोशल मीडिया पर बिताते हैं। दुनिया में सबसे ज़्यादा इंटरनेट उपयोगकर्ता होने के बावजूद, यहाँ सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला औसत समय कई अन्य देशों की तुलना में कम है।
सोशल मीडिया, अगर संयम से इस्तेमाल किया जाए, तो सूचना और मनोरंजन का एक अच्छा स्रोत है। हालाँकि, इस पर लगातार घंटों बिताना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और उत्पादकता पर भी असर डाल सकता है।