अन्नामलाई के बाद BJP को लगेगा एक और महा-झटका! कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में 'घर वापसी' की अटकलें तेज, हुड्डा ने किया बड़ा दावा

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर सांगठनिक स्तर पर असंतोष और बगावत की खबरें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। दक्षिण भारत में तमिलनाडु बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व आईपीएस के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच, अब उत्तर भारत के पंजाब सूबे से बीजेपी के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में 'घर वापसी' को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। पंजाब में साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के एक बेहद वरिष्ठ नेता के दावे ने इस चर्चा को राजनीतिक गलियारे का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया है।

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बड़ा दावा: 'कैप्टन हमारे लगातार संपर्क में हैं'

इस पूरे सियासी घटनाक्रम को हवा तब मिली जब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया। हुड्डा ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा, "कैप्टन अमरिंदर सिंह इस वक्त हमारे लगातार संपर्क में हैं। वह लंबे समय तक कांग्रेस के बेहद वरिष्ठ नेता रहे हैं और हमारे बहुत पुराने व सम्मानीय साथी हैं।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के बीच बेहद घनिष्ठ और दोस्ताना संबंध रहे हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि हुड्‌डा ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में दोबारा सम्मानजनक वापसी के मुख्य सूत्रधार (वाहक) बनें। दूसरी तरफ, हुड्डा के इस दावे पर पंजाब बीजेपी ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। पंजाब बीजेपी के आधिकारिक प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने पलटवार करते हुए कहा, "नेताओं का आपस में संपर्क में होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। खुद कांग्रेस के भीतर रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा अपनी ही पार्टी में किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ बातचीत होने का दावा किया है, इसका कोई और राजनीतिक मायना नहीं निकाला जाना चाहिए।"

बीजेपी में पूछ न होने से बेहद खफा हैं कैप्टन: 'वहां सब कुछ ऊपर से थोपा जाता है'

कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में दोबारा शामिल होने की चर्चाओं को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंकि वे पिछले कुछ समय से सार्वजनिक और निजी मंचों पर खुलकर कांग्रेस की कार्यशैली की तारीफ कर रहे हैं और बीजेपी की आंतरिक संस्कृति पर सवाल उठा रहे हैं। कैप्टन ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:

"जब मैं कांग्रेस में था, तो पंजाब से जुड़े हर छोटे-बड़े फैसले और रणनीति को लेकर पार्टी हाईकमान हमेशा मुझसे सलाह-मशविरा करता था। मैं तीन बार पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा आंतरिक लोकतंत्र का सम्मान किया जाता था। लेकिन, बीजेपी के भीतर पूरी तरह से एक अलग और कॉर्पोरेट संस्कृति है, जहां सीधे ऊपर से (दिल्ली से) फैसले लेकर नीचे थोप दिए जाते हैं।"

आपको बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में केवल ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रधान (अध्यक्ष) बनाए जाने का भीतर ही भीतर कड़ा विरोध किया था। इस बेहद महत्वपूर्ण सांगठनिक नियुक्ति को लेकर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पंजाब के सबसे कद्दावर नेता होने के बावजूद कैप्टन से कोई राय या मशविरा नहीं लिया था, जिससे वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

"मैं आज भी कांग्रेस परिवार को मिस करता हूं..." राहुल गांधी के संदेश से बढ़ीं दूरियां

कैप्टन ने कुछ दिनों पहले बेहद भावुक होते हुए एक बयान में स्वीकार किया था, "मैं आज भी कांग्रेस को बहुत मिस करता हूं। कांग्रेस सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह काम करती है। मैं जब भी दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व को फोन करता था, तो वे तुरंत समय निकालकर मुझसे गर्मजोशी से मिलते थे, मगर बीजेपी में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है।"

कैप्टन की बीजेपी से दूरियों और गांधी परिवार से नजदीकियों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके जन्मदिन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद उन्हें बधाई संदेश भेजा था। यही नहीं, हाल ही में जब कैप्टन के भाई रणधीर सिंह का दुखद निधन हुआ, तब भी राहुल गांधी ने तुरंत शोक संदेश भेजकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं। इसके उलट, बीजेपी के केंद्रीय या स्थानीय नेतृत्व की तरफ से उनके भाई के निधन पर कोई बड़ी संवेदना या सहानुभूति प्रकट नहीं की गई, जिसने कैप्टन को अंदर तक आहत किया।

अकाली दल से गठबंधन के मुद्दे पर भी आमने-सामने है बीजेपी और कैप्टन

पंजाब की चुनावी रणनीति को लेकर भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और बीजेपी आलाकमान के विचार बिल्कुल अलग-अलग दिशा में जा रहे हैं। कैप्टन का साफ मानना है कि पंजाब में सिखों और किसानों के बीच अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने के लिए बीजेपी को हर हाल में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा गठबंधन करना चाहिए और वे खुलकर इसकी पैरवी कर रहे हैं।

इसके बिल्कुल विपरीत, पंजाब बीजेपी के स्थानीय नेता बार-बार मीडिया में बयान दे रहे हैं कि पार्टी आगामी चुनाव में पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले (बिना किसी बैसाखी के) चुनाव लड़ेगी। विचारों के इस भयंकर टकराव के चलते कैप्टन बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही खुद को पूरी तरह अलग-थलग और हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।

उधर तमिलनाडु में के. अन्नामलाई की बगावत से बैकफुट पर बीजेपी

हैरानी की बात यह है कि कैप्टन की बगावत का यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब दक्षिण भारत के सबसे अहम सूबे तमिलनाडु में बीजेपी के फायरब्रांड पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के पार्टी से आधिकारिक इस्तीफे को लेकर अटकलें चरम पर हैं।

हालांकि, दिल्ली से आ रही खबरों के मुताबिक, बीजेपी आलाकमान ने फिलहाल अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन, एविएशन और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई बीजेपी से पूरी तरह नाता तोड़कर तमिलनाडु में एक नए क्षेत्रीय दल (Third Front) का गठन कर सकते हैं। फिलहाल, अन्नामलाई ने आधिकारिक रूप से अपने पत्तों को नहीं खोला है, लेकिन यदि कैप्टन और अन्नामलाई दोनों बीजेपी का साथ छोड़ते हैं, तो यह 2026 में बीजेपी के सांगठनिक ढांचे के लिए अब तक का सबसे विनाशकारी झटका साबित होगा।