यूपी, बिहार और दिल्ली के सर्राफा बाजार में लुढ़के चांदी के दाम! 31 जुलाई को जानिए कितनी सस्ती हुई चांदी और क्या चल रहा है ताजा भाव
भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ समय से जारी उतार-चढ़ाव के बीच आखिरकार बहुमूल्य सफेद धातु यानी चांदी के ग्राहकों के लिए एक सुकून भरी खबर सामने आई है। महीने के आखिरी कारोबारी दिन यानी 31 जुलाई को देश के प्रमुख उत्तर भारतीय राज्यों और महानगरों में चांदी की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है और इसके दामों में नरमी दर्ज की गई है। लगातार ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रही चांदी की कीमतों में आई इस हल्की गिरावट से उन खुदरा खरीदारों और आभूषण प्रेमियों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कई दिनों से दाम कम होने का इंतजार कर रहे थे। कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में इस तरह के करेक्शन से बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी का ताजा हाल और गिरावट
देश की राजधानी दिल्ली के बुलियन मार्केट में 31 जुलाई के रोज चांदी के कारोबार में सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला। स्थानीय सर्राफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में एक किलोग्राम शुद्ध चांदी (999 purity) के दाम में लगभग 1,300 रुपये तक की कमी दर्ज की गई है, जिसके बाद यहां भाव घटकर 2,18,600 से 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम (विभिन्न शुद्धता और कर मानकों के आधार पर) के दायरे में ट्रेड कर रहा है। खुदरा जेवरात बाजारों में 10 ग्राम चांदी का भाव करीब 2,186 रुपये और 100 ग्राम चांदी का दाम 21,860 रुपये के आसपास चल रहा है। दिल्ली देश का एक बड़ा कमोडिटी हब होने के कारण यहां के दामों में आने वाला बदलाव आसपास के एनसीआर क्षेत्रों जैसे नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के बाजारों पर भी सीधा असर डालता है।
उत्तर प्रदेश (लखनऊ, कानपुर और नोएडा) में चांदी के दाम
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे राजधानी लखनऊ, कानपुर, मेरठ और नोएडा में भी 31 जुलाई को चांदी की कीमतों में हल्की राहत भरी गिरावट दर्ज की गई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में आज चांदी के भाव में लगभग 1,600 रुपये तक की उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे यह फिसलकर करीब 2,20,147 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है, जबकि इसके पिछले सत्र में यह 2.21 लाख रुपये से ऊपर बंद हुआ था। नोएडा और गाजियाबाद जैसे सटे हुए इलाकों में भी खुदरा व्यापारियों ने कीमतों में इस मामूली करेक्शन के बाद ग्राहकों की पूछताछ में तेजी आने की बात कही है। जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय बाजारों में मांग के स्थानीय कारकों के चलते महानगरों की तुलना में कीमतों में आंशिक अंतर देखने को मिल सकता है।
बिहार की राजधानी पटना और अन्य जिलों में चांदी की स्थिति
बिहार के सर्राफा बाजार में भी आज का दिन चांदी खरीदारों के लिए सकारात्मक रहा है। राज्य की राजधानी पटना में 31 जुलाई को चांदी के भाव में लगभग 1,500 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यहाँ चांदी का खुदरा भाव 2,18,500 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास दर्ज किया गया। पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे अन्य बड़े व्यापारिक केंद्रों में भी कमोबेस यही रुख बना रहा। बिहार के स्थानीय आभूषण व्यापारियों का कहना है कि सावन महीने और आने वाले त्योहारी सीजन के मद्देनजर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से चांदी के छोटे सिक्कों और हल्के जेवरात की मांग लगातार बनी हुई है, ऐसे में मामूली गिरावट आने से मध्यम वर्ग के ग्राहकों को खरीदारी में सहूलियत मिल रही है।
कीमतों में अचानक आई इस नरमी के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
कमोडिटी और बुलियन एक्सपर्ट्स के अनुसार, घरेलू बाजारों में चांदी की कीमतों में आई इस सुस्ती के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कारक और निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली (Profit Booking) जिम्मेदार है। पिछले कुछ हफ्तों में धातुओं के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके थे, जिसके बाद बड़े निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का रास्ता अपनाया। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी गतिविधियों ने भी कीमती धातुओं की चाल को प्रभावित किया है। जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तो सर्राफा बाजार में सोने और चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं पर दबाव बढ़ जाता है, जिसका असर भारतीय बाजारों में भी साफ तौर पर दिखाई देता है।
अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट (Comex) और वैश्विक संकेत
भारत में चांदी का आयात बड़े पैमाने पर किया जाता है, यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) में होने वाला हर एक उतार-चढ़ाव घरेलू दरों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंजों पर आज चांदी की कीमतें मामूली कमजोरी के साथ ट्रेड करती नजर आईं, जिसका असर दिल्ली, यूपी और बिहार समेत पूरे देश के सर्राफा मंडलों पर पड़ा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर आने वाले दिनों में जो नीतियां बनेंगी, वे चांदी के अगले रुख को तय करेंगी। वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग (Industrial Demand) विशेषकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की खपत लगातार बनी हुई है, जो इसकी कीमतों को बहुत ज्यादा नीचे गिरने से रोकने में बड़ा सपोर्ट दे रही है।
निवेशकों और आम खरीदारों के लिए आगे की क्या है रणनीति?
यदि आप आने वाले दिनों में चांदी में निवेश करने का मन बना रहे हैं या अपने परिवार के किसी आयोजन के लिए आभूषण खरीदने की सोच रहे हैं, तो बाजार के इस उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। वित्तीय विश्लेषकों की सलाह है कि बाजार में जब भी इस तरह का करेक्शन या हल्की गिरावट आए, तो एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय टुकड़ों में (SIP फॉर्मेट में) निवेश करना ज्यादा समझदारी होती है। चांदी एक तरफ जहां पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश का साधन मानी जाती है, वहीं इसमें औद्योगिक उपयोग की मांग के कारण लंबी अवधि में बेहतरीन रिटर्न देने की क्षमता भी होती है। सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर खरीदारी करना निवेशकों के लिए एक अच्छा और संतुलित अवसर साबित हो सकता है।