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July 08 2026 01:59 pm

₹4000 का कफन और ₹45000 की कब्र, बेहाल अवाम अब अपनों के अंतिम संस्कार के लिए ले रही है कर्ज

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कंगाली और कर्ज के दलदल में फंसे पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक ऐसी दर्दनाक और कड़वी जमीनी हकीकत सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। आसमान छूती बेतहाशा महंगाई के कारण पाकिस्तान में अब सिर्फ दो वक्त की रोटी कमाना और जिंदा रहना ही मुहाल नहीं हुआ है, बल्कि सम्मानजनक तरीके से 'मरना' भी आम इंसान की हैसियत से बाहर हो चुका है। रावलपिंडी और राजधानी इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्थिक तंगी का आलम यह है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके कफन-दफन और अंतिम विदाई के लिए स्थानीय साहूकारों से भारी ब्याज पर कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

कफन-दफन भी बना बड़ा वित्तीय संकट: कब्रिस्तानों में खत्म हुई जगह, 'हाउसफुल' के लगे बोर्ड

पाकिस्तानी मीडिया संस्थान 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी के कम आय वाले रिहायशी इलाकों में कफन-दफन अब एक गंभीर आर्थिक संकट का रूप ले चुका है। अतीत में पाकिस्तानी समाज में यह परंपरा थी कि किसी के निधन पर पड़ोसी और स्थानीय स्वयंसेवक मदद के तौर पर मुफ्त में कब्र खोद दिया करते थे और कफन का इंतजाम सामूहिक सहयोग से हो जाता था, लेकिन मौजूदा आर्थिक तबाही ने इस सामाजिक ताने-बाने को पूरी तरह तोड़ दिया है।

अब जिन सेवाओं को पहले पुण्य या सामाजिक मदद के रूप में देखा जाता था, उनके लिए लोगों को मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। इसके अतिरिक्त, शहरों के सरकारी और निजी कब्रिस्तानों में शवों को दफनाने के लिए जगह तेजी से खत्म हो रही है। कई प्रमुख कब्रिस्तानों के बाहर बकायदा 'कब्र के लिए जगह खाली नहीं है' के बोर्ड टांग दिए गए हैं। जगह की इस अभूतपूर्व किल्लत के चलते अब पुरानी और लावारिस कब्रों को खोदकर वहां नए शवों को दफनाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

कफन से लेकर पक्की कब्र तक के हैरान करने वाले रेट

महंगाई की इस सुनामी ने अंतिम संस्कार से जुड़ी एक-एक छोटी सामग्री की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। पाकिस्तानी रुपये (PKR) में मौजूदा खर्चों का लेखा-जोखा कुछ इस प्रकार है:

कफन का कपड़ा: 3,000 से 4,000 रुपये

धार्मिक सामग्री (कपूर, अगरबत्ती, गुलाब जल, फूल): 2,000 से 2,500 रुपये

कब्र की जमीन, खुदाई और ईंटों की भराई: 40,000 से 45,000 रुपये

शव को नहलाने (गुस्ल) की मजदूरी: 1,000 से 1,500 रुपये

ईंट और सीमेंट की पक्की साधारण कब्र: लगभग 15,000 रुपये अलग से

हल्की क्वालिटी के मार्बल का स्ट्रक्चर: 25,000 रुपये

उच्च क्वालिटी के मार्बल वाली कब्र की सजावट: 30,000 रुपये के पार

आंकड़ों में घटी महंगाई पर जमीनी हकीकत जस की तस

साल 2023 के ऐतिहासिक वित्तीय संकट के समय पाकिस्तान में आधिकारिक महंगाई दर 40 प्रतिशत के करीब पहुंच गई थी। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) द्वारा जारी जून 2026 के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में उपभोक्ता महंगाई दर (CPI) घटकर 11.1% (शहरी क्षेत्रों में 11.2% और ग्रामीण इलाकों में 10.9%) पर आ गई है।

कागजों पर यह दर पहले के मुकाबले भले ही कम और संतोषजनक दिखाई दे रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर आटा, दाल, दूध, बिजली के बिल, रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर स्थिर हो चुकी हैं। इस वजह से कफन-दफन पर होने वाला अचानक खर्च आम जनता के मासिक बजट को पूरी तरह तबाह कर रहा है।

अवाम को राहत नहीं, रक्षा खर्च में 18% की बढ़ोतरी और IMF की कड़ी शर्तें

गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार के पास भी अपनी अवाम को इस संकट से उबारने या कोई सब्सिडी देने के लिए खजाने में पैसा नहीं है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए घोषित किए गए 18.77 ट्रिलियन रुपये के कुल राष्ट्रीय बजट में से सरकार ने अपने रक्षा बजट को 18% बढ़ाकर सीधे 3 ट्रिलियन रुपये कर दिया है। इसके विपरीत, पूरे देश के विकास कार्यों (PSD) के लिए महज 1 ट्रिलियन रुपये आवंटित किए गए हैं।

इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिले 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के कार्यक्रम को बचाए रखने के लिए शहबाज शरीफ सरकार को टैक्स बढ़ाने और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती करने जैसे बेहद सख्त और कड़े आर्थिक नियम मानने पड़ रहे हैं। हालांकि सरकारी आर्थिक सर्वेक्षण का दावा है कि वित्त वर्ष 2026 में देश की जीडीपी ग्रोथ 3.7% रही है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है, और प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1,901 डॉलर हो गई है। लेकिन रावलपिंडी के कब्रिस्तानों के बाहर अपनों को दफनाने के लिए भीख और कर्ज मांगने वाले मजबूर लोगों की दर्दभरी कहानियां यह साफ बयां करती हैं कि इन कागजी और मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों का हकीकत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।