'शाहेद' का जवाब 'स्काइवास्प': ईरान को टक्कर देने के लिए अमेरिका-सऊदी अरब बनाएंगे आत्मघाती ड्रोन

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India News Live,Digital Desk : ईरान के 'शाहेद' ड्रोन्स ने युद्ध के मैदान में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नाक में दम कर रखा है। इन सस्ते और घातक ड्रोन्स के कारण अमेरिका को न केवल भारी नुकसान उठाना पड़ा है, बल्कि उसकी अरबों डॉलर की डिफेंस प्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। अब इसी चुनौती का सामना करने के लिए अमेरिका और सऊदी अरब ने हाथ मिला लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब ये दोनों देश मिलकर ईरान के शाहेद जैसे ही 'स्काइवास्प' (SKYWASP) ड्रोन विकसित करने जा रहे हैं।

क्या है अमेरिका-सऊदी अरब का नया प्लान?

रियाद में बनने वाली एक नई डिफेंस फैसिलिटी में इन 'अटैक ड्रोन्स' का उत्पादन किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट अमेरिकी और सऊदी कंपनियों की एक बड़ी साझेदारी का हिस्सा है। स्काइवास्प ड्रोन को 'वन-वे स्ट्राइक' (आत्मघाती हमले) के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जो बिल्कुल ईरान के शाहेद ड्रोन की तरह काम करेगा। इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर होने का दावा किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि इसे सऊदी अरब की धरती से लॉन्च कर सीधे तेहरान तक निशाना बनाया जा सकता है।

क्यों पड़ी इन ड्रोन्स की जरूरत?

ईरान के शाहेद ड्रोन आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदल रहे हैं, और इसकी मुख्य वजह उनकी 'लागत' है:

सस्ता और घातक: ईरान का एक शाहेद ड्रोन महज 35,000 डॉलर (करीब 29 लाख रुपये) में तैयार हो जाता है।

महंगा डिफेंस: इन सस्ते ड्रोन्स को मार गिराने के लिए अमेरिका और सऊदी अरब को 'पैट्रियट' जैसी बेहद महंगी मिसाइल डिफेंस प्रणालियों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसकी एक मिसाइल की कीमत करोड़ों रुपये है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट: हालिया संघर्ष में ईरान ने इन्हीं ड्रोन्स के जरिए खाड़ी देशों के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिकी ठिकानों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए अमेरिका और सऊदी अरब को भी अब उसी की भाषा में जवाब देने वाले सस्ते और घातक ड्रोन सिस्टम की जरूरत है।

युद्ध के मैदान में बदलेगा गेम

SR2 के को-फाउंडर और चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर लुसिएन ज़िग्लर के अनुसार, स्काइवास्प प्रोग्राम मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र में पूरी तरह से 'गेम-चेंजर' साबित होगा। यह न केवल सऊदी अरब की सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि ईरान को यह अहसास भी दिलाएगा कि वह अब केवल अकेला 'ड्रोन पावर' नहीं है।

बंदर अब्बास पोर्ट से लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक फैली इस जंग में, यह नई ड्रोन साझेदारी आने वाले दिनों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को और अधिक तनावपूर्ण बना सकती है। क्या अमेरिका और सऊदी अरब का यह 'क्लोन' ईरान की चुनौती को रोक पाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।