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August 19 2026 02:41 am

CJP छात्र प्रदर्शन पर पुलिस 'ज्यादती' को लेकर SC सख्त! CJI सूर्यकांत की 5 बड़ी बातें; SIT जांच और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश

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राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देशभर में NEET पेपर लीक और CJP द्वारा आयोजित छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए 18 साल से कम उम्र के उन प्रदर्शनकारी छात्रों को तुरंत रिहा करने का साफ निर्देश दिया, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल सहित सभी प्रभावित राज्यों को निर्देश दिया कि वे प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस संदेश और पीसीआर (PCR) लॉग जैसे डिजिटल सबूतों को पूरी तरह सुरक्षित रखें।

पुलिस बर्बरता पर पूर्व जज की अध्यक्षता में SIT जांच के संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर पेलेट गन, आंसू गैस, लाठीचार्ज और इलेक्ट्रिक शॉक जैसे हथियारों के कथित इस्तेमाल और महिलाओं व पत्रकारों से मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीठ ने संकेत दिया कि इन घटनाओं की पारदर्शी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के ही किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) या हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए फिलहाल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक दंडात्मक कार्रवाई न करने का अंतरिम आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की 5 सबसे बड़ी और सख्त बातें

जवाबदेही सभी पक्षों की तय होगी: CJI ने कहा कि यदि जांच में उल्लंघन साबित होता है, तो कानून हाथ में लेने या अत्याचार करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।

निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी: कोर्ट ने कहा कि महिलाओं, वकीलों और मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट के गंभीर आरोपों को देखते हुए पहली नजर में स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच का मजबूत मामला बनता है।

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन एक आवश्यक अंग हैं। इसलिए ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि सार्वजनिक प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण के लिए एक साफ और सर्वमान्य राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाया जाए।

हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों पर भी कार्रवाई: CJI ने कहा कि जांच में पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी निष्पक्ष पड़ताल होगी, ताकि यह पता चल सके कि हिंसा में छात्र शामिल थे या केंद्र सरकार के दावे के अनुसार बाहरी "शरारती तत्व" घुसे थे। 200 से अधिक घायल पुलिसकर्मियों की चिंता भी अहम है।

प्रोटोकॉल तोड़ने पर सीधे कानूनी कार्रवाई: पीठ ने जोर देकर कहा कि एक बार राष्ट्रीय प्रोटोकॉल लागू हो जाने के बाद भविष्य में उसका उल्लंघन करने वाले किसी भी पक्ष के खिलाफ कानून पूरी सख्ती से अपना काम करेगा।