Saudi Arabia and Pakistan's new alliance : भारत को सतर्क रहने की जरूरत
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-18 14:43:00
India News Live,Digital Desk : सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए एक बड़े रक्षा समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ की सऊदी अरब यात्रा के दौरान हुआ। आइए जानते हैं कि इस सौदे में क्या खास है और यह भारत के लिए क्यों चिंता का विषय बन गया है।
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते का उद्देश्य
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने नाटो जैसी साझेदारी का रूप देने वाला रक्षा समझौता किया है। इस समझौते की खास बात यह है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने बुधवार को इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
इस सौदे का असर मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर साफ दिखाई दे रहा है। समझौते के मुताबिक, अगर पाकिस्तान पर हमला होता है, तो सऊदी अरब उसका साथ देगा, और अगर सऊदी अरब पर हमला होता है, तो पाकिस्तान समर्थन करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए भरोसेमंद सहयोगी की तलाश में था। वहीं, सऊदी अरब भी यह सुनिश्चित करना चाहता था कि उसका क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित न हो, खासकर इज़राइल के संदर्भ में।
भारत की रणनीति और प्रतिक्रिया
भारत हमेशा से अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहा है। सऊदी और पाकिस्तान के बीच यह नया रक्षा समझौता भारत के लिए कई सवाल खड़े करता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस सौदे को गंभीरता से देख रहा है और इसके सभी पहलुओं का विश्लेषण करेगा। भारत अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत बनाए रखने के लिए सतत प्रयास कर रहा है।
सरकार इस समझौते के घरेलू और वैश्विक प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी। मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करने पर होगा कि यह समझौता भारत के हितों के खिलाफ न जाए।