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October 01 2026 07:42 pm

'नीला ड्रम कांड' में फांसी के डर से सहमी मुस्कान, जेल में पहली बार बिलख-बिलखकर रोया साहिल

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मेरठ के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'नीला ड्रम कांड' में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अभियुक्तों के भीतर कानून और मुकद्दर का खौफ साफ दिखने लगा है। मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दे दिया है। अदालत आगामी 14 अक्टूबर को दोनों की सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी। सजा के ऐलान में महज कुछ दिनों का वक्त बाकी है, लेकिन संभावित फांसी की सजा का डर दोनों को मानसिक रूप से तोड़ चुका है। जेल की सलाखों के पीछे पहुंचते ही दोनों सदमे की हालत में आ गए हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, बेखौफ दिखने वाला साहिल जेल में पहली बार फूट-फूटकर रोया, वहीं अपनी दुधमुंही बच्ची के भविष्य को लेकर बदहवास मुस्कान की हालत देखकर जेल प्रशासन को विशेष कदम उठाने पड़ रहे हैं।

फांसी के खौफ से गुमसुम मुस्कान, जेल प्रशासन कराएगा मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग

अदालत का फैसला आने के बाद से मुस्कान जेल के महिला वार्ड में अपनी मासूम बच्ची को सीने से चिपकाए लगातार आंसू बहा रही है। उसके चेहरे पर किए का पछतावा और आने वाली सजा का खौफ साफ देखा जा सकता है। मुस्कान ने जेल अधीक्षक से मिलकर अपनी बच्ची के भविष्य और पालन-पोषण को लेकर कई सवाल किए। इसके अलावा उसने कानूनी मदद के लिए लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (सालसा सिस्टम), अदालत की आगामी प्रक्रिया और वकीलों से जुड़ी जानकारियां भी मांगी हैं। सबसे दर्दनाक पहलू यह भी है कि इस जघन्य वारदात के बाद परिजनों ने भी उससे पूरी तरह किनारा कर लिया है और जेल में उससे मिलने अब तक कोई सगा-संबंधी नहीं पहुंचा है। मुस्कान के अत्यधिक मानसिक तनाव और अवसाद को देखते हुए जेल प्रशासन उसकी मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग (Counseling) कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि वह कोई अप्रिय कदम न उठा ले।

सलाखों के पीछे पहली बार छलके साहिल के आंसू, दूसरी जेल में शिफ्ट करने की तैयारी

दूसरी ओर, पुरुष बैरक में बंद उसका साथी साहिल शुक्ला भी पूरी तरह टूट चुका है। जेल के अन्य बंदियों और सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद से अब तक सख्त दिखने वाला साहिल फैसला सुनते ही पहली बार जेल में फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने दिनभर किसी से बात नहीं की और गुमसुम बैठा रहा। 14 अक्टूबर को आने वाले फैसले पर दोनों की सांसें अटकी हुई हैं। जेल अधिकारियों के मुताबिक, सजा मुकर्रर होने के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक नियमों के तहत दोनों दोषियों को राज्य की किसी अन्य उच्च सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल में स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जा सकता है।

पति के टुकड़े कर सीमेंट से ड्रम में जमाया था शव, जज बोले- साक्ष्यों ने किया जुर्म साबित

यह रूह कंपा देने वाला मामला 4 मार्च 2025 का है, जब अवैध संबंधों और साजिश के तहत मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने और पहचान छिपाने के लिए सौरभ के शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर नमक और सीमेंट के घोल से पूरी तरह सील कर दिया था। बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को दोषी करार देते हुए तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पत्रावलियों और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य बिना किसी संदेह के यह सिद्ध करते हैं कि इस जघन्य और सुनियोजित हत्याकांड को इन दोनों ने मिलकर ही अंजाम दिया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें 14 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब अदालत तय करेगी कि इस बर्बर अपराध के लिए दोनों को उम्रकैद मिलेगी या फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा।