पटौदी ट्रॉफी विवाद पर बोले सचिन तेंदुलकर : 'मैंने खुद पटौदी परिवार को फोन किया
India News Live,Digital Desk : भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाली क्रिकेट सीरीज का नाम अब 'तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी' होगा। इस बदलाव को लेकर जब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी, तो अब सचिन तेंदुलकर ने खुद इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
सचिन ने साफ किया कि ट्रॉफी का नाम बदलने का फैसला भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) का था, और उन्हें बाद में इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया, "मैं अब आपको पूरी सच्चाई बताता हूं। इस फैसले में मेरी कोई भूमिका नहीं थी, बीसीसीआई और ईसीबी ने मिलकर यह निर्णय लिया और बाद में मुझे इसकी जानकारी दी गई।"
पटौदी ट्रॉफी का नाम बदलने पर उठे विवाद के बीच तेंदुलकर ने टाइगर पटौदी और उनके परिवार के योगदान को लेकर सम्मान जताया। उन्होंने कहा, "मैं भलीभांति जानता हूं कि पटौदी परिवार ने भारतीय क्रिकेट के लिए कितना बड़ा योगदान दिया है। टाइगर पटौदी ने न सिर्फ भारत के लिए कप्तानी की, बल्कि उनकी कहानियां आज भी प्रेरणा देती हैं।"
सचिन ने आगे बताया, "मैंने खुद पटौदी परिवार से संपर्क किया और यह सुनिश्चित किया कि उनकी विरासत खत्म न हो। मैंने जय शाह, बीसीसीआई और ईसीबी से बातचीत की और आग्रह किया कि ट्रॉफी का नाम भले ही बदला जाए, लेकिन पटौदी परिवार की पहचान बनी रहनी चाहिए।" अब सीरीज जीतने वाले कप्तान को 'पटौदी मेडल ऑफ एक्सीलेंस' से सम्मानित किया जाएगा।
सचिन ने बताया कि उनका इंग्लैंड से एक भावनात्मक रिश्ता है। उन्होंने कहा, "मेरी पहली इंटरनेशनल फ्लाइट 1988 में इंग्लैंड के लिए थी। वहीं, मेरा पहला टेस्ट शतक भी मैनचेस्टर में ही बना था, जिसने भारत को हार से बचाया। मैंने यॉर्कशायर के लिए खेला और मैं पहला गैर-अंग्रेज खिलाड़ी था जिसे इस काउंटी टीम ने चुना। मेरी सास भी इंग्लैंड से हैं, तो मेरा पारिवारिक जुड़ाव भी है।"
अंत में उन्होंने कहा, “मैं बेहद विनम्र हूं कि मेरे नाम पर यह ट्रॉफी रखी गई। जेम्स एंडरसन भी इंग्लैंड के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं। मुझे गर्व है कि हमारे नाम पर यह नई शुरुआत हो रही है।”