डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर 95.40 के पार पहुंचा भाव
India News Live, Digital Desk: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार, 5 मई 2026 को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया। सोमवार को यह 95.23 पर बंद हुआ था, लेकिन आज बाजार खुलते ही इसमें 17 पैसे की और गिरावट देखी गई। रुपये की इस कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आयात बिल को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
क्यों टूट रहा है रुपया? अर्थव्यवस्था पर चौतरफा दबाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये के गिरने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं:
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ताजा हमलों ने अमेरिका-ईरान तनाव को फिर से हवा दे दी है, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।
मिडिल ईस्ट में तनाव: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशक जोखिम भरे बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे डॉलर और सोना) की ओर भाग रहे हैं।
विदेशी फंड की निकासी: भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार फंड निकाला जाना भी रुपये पर दबाव बना रहा है।
शेयर बाजार में भी कोहराम: सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर भी देखने को मिला। मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले:
BSE सेंसेक्स: सुबह 9:40 बजे तक सेंसेक्स 179 अंक गिरकर 77,090.12 पर कारोबार कर रहा था।
NSE निफ्टी: निफ्टी50 भी 64 अंक टूटकर 24,036.95 के स्तर पर आ गया। बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है, क्योंकि तेल महंगा होने से इन कंपनियों की लागत बढ़ने का डर है।
क्या 96 के स्तर तक जाएगा रुपया?
HDFC सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि यदि डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो रुपया आने वाले दिनों में 95.70 से 96.00 के स्तर तक भी जा सकता है। डॉलर की बढ़ती मांग और भारत के बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) के कारण फिलहाल रुपये में सुधार की संभावना कम नजर आ रही है।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का सीधा मतलब है कि भारत के लिए आयात (Import) महंगा हो जाएगा।
महंगाई: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और सब्जियों व अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी कलपुर्जे महंगे हो सकते हैं।
विदेशी पढ़ाई और यात्रा: विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए फीस भरना और विदेश घूमना अब काफी महंगा पड़ेगा।