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October 26 2026 04:22 am

सपा के गढ़ में रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी कल भरेंगे हुंकार, मुरादाबाद की इन 'कठिन' सीटों पर टिकी गठबंधन की निगाहें

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मुरादाबाद : समाजवादी पार्टी (सपा) का मजबूत गढ़ माने जाने वाले मुरादाबाद मंडल में अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, केंद्रीय मंत्री और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी कल यानी 4 जून 2026 (गुरुवार) को मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक विशाल रैली को संबोधित कर हुंकार भरेंगे। रालोद की नजरें विशेष रूप से मुरादाबाद की उन विधानसभा सीटों पर टिकी हैं, जहां बीजेपी लंबे समय से जीत का स्वाद चखने को तरस रही है। इस रैली को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाएंगे जयंत

रालोद के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह का हमेशा से गहरा भावनात्मक और राजनीतिक नाता रहा है। अब उसी पुरानी परिपाटी और पैठ को पुनर्जीवित करने के लिए पार्टी मुखिया जयंत चौधरी खुद मैदान में उतर रहे हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले समीकरण बदले और रालोद ने भाजपा के साथ एनडीए (NDA) गठबंधन का हिस्सा बनकर केंद्र में मंत्री पद हासिल किया। अब इस नए गठबंधन को जमीनी स्तर पर परखने की तैयारी है।

कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और विजय यादव ने झोंकी ताकत

जयंत चौधरी की इस ठाकुरद्वारा रैली को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए रालोद के प्रदेश स्तरीय नेताओं और योगी कैबिनेट में रालोद कोटे से मंत्री बने अनिल कुमार ने खुद कमान संभाल रखी है। वे लगातार क्षेत्र में सघन जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।

इस सियासी समीकरण में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय पूर्व विधायक विजय यादव के रूप में जुड़ा है, जो 2007 में बसपा के टिकट पर ठाकुरद्वारा से चुनाव जीत चुके हैं। उनके रालोद के साथ सक्रिय होने को दूरगामी सियासत और क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को साधने की एक बड़ी और सोची-समझी जुगत के रूप में देखा जा रहा है।

मुरादाबाद की इन 3 प्रमुख सीटों पर है रालोद का पूरा फोकस

मुरादाबाद जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से पिछले चुनाव में भाजपा को केवल मुरादाबाद नगर सीट पर ही जीत मिल सकी थी (बाद में कुंदरकी उपचुनाव भी भाजपा ने जीता था)। बाकी की 4 सीटें सपा के कब्जे में हैं। इस राजनीतिक वैक्यूम को भरने के लिए रालोद ने अपनी रणनीति तैयार की है:

ठाकुरद्वारा सीट: यहां से रैली की शुरुआत कर रालोद अपनी ताकत का अहसास कराना चाहती है।

कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण सीट: इन दोनों सीटों पर रालोद अपना परंपरागत वोट बैंक (किसान और जाट बाहुल्य) मानती है।

रालोद के रणनीतिकारों की सोच है कि जिन सीटों पर भाजपा लगातार हार रही है और जो सीटें भगवा खेमे के लिए बेहद कठिन मानी जाती हैं, वहां भाजपा आसानी से सहयोगी दल रालोद के प्रत्याशियों को मौका दे सकती है। इससे भाजपा को भी कोई ऐतराज नहीं होगा और गठबंधन मजबूत होगा।

सपा की बंजर भूमि पर क्या चलेगा रालोद का हैंडपंप?

इस रैली का एक बड़ा निहितार्थ यह भी है कि जयंत चौधरी अपने मूल मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार में शामिल होने के बाद भी राष्ट्रीय लोकदल उतनी ही सक्रियता से उनके हितों के लिए लड़ रही है। सपा के इस अभेद्य गढ़ में भाजपा और रालोद दोनों के लिए ही डैमेज कंट्रोल करना और जीत दर्ज करना आसान नहीं रहा है। लेकिन कार्यकर्ताओं में इस समय उत्साह चरम पर है और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा का कैडर और रालोद का परंपरागत वोट बैंक एक साथ मिल गया, तो आगामी चुनावों में मुरादाबाद की इस सियासी बंजर भूमि पर भी रालोद का हैंडपंप 'विजय श्री' का जल निकालने में कामयाब हो सकता है।