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August 19 2026 02:49 am

जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़ने के आसार, प्याज, तेल और चावल के बाद अब रसोई का बजट बिगाड़ेगी चीनी

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देश में एक बार फिर आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 तक खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.5 फीसदी तक पहुंच सकती है, जिससे एक बार फिर रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। साल के शुरुआती महीनों से ही भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। आइए जानते हैं कि इस नई रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों और महंगाई को लेकर क्या खास बातें सामने आई हैं।

रसोई का बजट बिगाड़ेंगी खाने के तेल, चावल और प्याज की बढ़ी कीमतें

देश में महंगाई का सबसे ज्यादा और सीधा असर आम आदमी की रसोई पर पड़ता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की इस ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खाने के तेल, चावल, दाल और प्याज जैसी बुनियादी और रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम में तेजी आने लगी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि मानसूनी बारिश और मंडियों में सब्जियों की बेहतर आवक के चलते फिलहाल टमाटर और कुछ अन्य मौसमी सब्जियों की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और 'TOP' (टमाटर, प्याज, आलू) की सप्लाई में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है। इसके बावजूद प्याज के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

चीनी के दामों में 17 फीसदी तक का उछाल, त्योहारी सीजन से पहले चिंता बढ़ी

खाद्य पदार्थों में केवल दाल और चावल ही नहीं, बल्कि हर घर की जरूरत बनने वाली चीनी की कीमतों में भी भारी तेजी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महज एक महीने के भीतर ही देश भर में चीनी के दामों में 17 प्रतिशत तक की जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके चलते चीनी की औसत कीमतें जो पहले 3,960 रुपये प्रति क्विंटल थीं, वे अब बढ़कर 4,620 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं। दूसरी ओर, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोर महंगाई (जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं हैं) जुलाई में 4 से 4.1 प्रतिशत के आसपास रह सकती है और सोने की कीमतों में नरमी के कारण पर्सनल केयर सेगमेंट में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इनपुट कॉस्ट बढ़ने से आने वाले दिनों में चुनौतियां बनी रहेंगी।