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September 23 2026 11:36 pm

बृजभूषण शरण सिंह और बाबा रामदेव में सुलह: खत्म हुआ जुबानी विवाद; योग गुरु बोले- पतंजलि के गाय के घी में कोई मिलावट नहीं

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भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच पतंजलि के उत्पादों और गाय के घी को लेकर बीते कई दिनों से जारी तल्ख जुबानी जंग अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। दोनों हस्तियों के बीच आमने-सामने की मुलाकात के बाद यह विवाद सुलझ गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबा रामदेव ने स्वयं इस पूरे मामले के पटाक्षेप की आधिकारिक घोषणा की। रामदेव ने साफ किया कि पूर्व सांसद को कुछ सुनी-सुनाई बातों के चलते गलतफहमी हो गई थी, जिसे बातचीत के जरिए दूर कर लिया गया है। इसके साथ ही रामदेव ने पतंजलि के गाय के देसी घी में मिलावट के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे शत-प्रतिशत खरा और प्रमाणित बताया।

'सुनी-सुनाई बातों से हुई थी गलतफहमी, बृजभूषण जी प्रणाम करके गए'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि लोग अक्सर बिना सच्चाई जाने दूसरों की बातों में आ जाते हैं। उन्होंने कहा, "बृजभूषण शरण सिंह को भी सुनी-सुनाई बातों और कुछ भ्रामक वीडियोज के कारण गलतफहमी हो गई थी। आज उन्होंने भी सारे मामले का पटाक्षेप कर दिया है। इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। आज वे मुझे आदरपूर्वक प्रणाम करके गए हैं और उन्होंने कहा कि वे संत और सनातन परंपरा का दिल से सम्मान करते हैं। हमने भी इस विवाद को यहीं खत्म करने का निर्णय लिया है क्योंकि एक संन्यासी का काम विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि शांति स्थापित करना है।"

रामदेव ने दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले लोगों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने मजाकिया और आत्मीय अंदाज में बताया कि उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह को पतंजलि घी के दो डिब्बे दिए हैं—एक डिब्बा स्वयं खाने के लिए और दूसरा किसी भी प्रतिष्ठित प्रयोगशाला (लैब) में जांच कराने के लिए।

पतंजलि घी पर सफाई: 'न दवा नकली है, न स्वामी रामदेव में कुछ नकली'

पतंजलि के गाय के घी और दवाओं पर खड़े किए जा रहे सवालों पर आक्रामक होते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि उनके किसी भी उत्पाद पर कोई सरकारी प्रतिबंध नहीं है और उनके उत्पाद कई देशों में निर्यात होते हैं। रामदेव ने कहा, "यह बात पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए कि न तो पतंजलि का गाय का घी मिलावटी है और न ही हमारी कोई आयुर्वेदिक दवा नकली है। यहां तक कि स्वामी रामदेव में भी कुछ नकली नहीं है। हम पूरी प्रामाणिकता और पारदर्शिता के साथ जीवन जीते हैं। हमारे नाम पर न एक इंच निजी जमीन है और न ही एक रुपये का बैंक बैलेंस। आज भी हम चटाई बिछाकर सोने वाले फकीर हैं।"

घी के उत्पादन और कीमत को लेकर उठ रहे सवालों का तकनीकी जवाब देते हुए योग गुरु ने समझाया कि पतंजलि देश भर से किसानों के जरिए लाखों लीटर गाय का दूध इकट्ठा करती है। जब दूध से मलाई (फैट) निकाली जाती है, तो बचे हुए दूध से लो-फैट मिल्क, मिल्क पाउडर, पनीर, दही और छाछ जैसे पांच अलग-अलग सह-उत्पाद (By-products) तैयार होते हैं। उन्होंने कहा कि नासमझ लोगों को यह बुनियादी अर्थशास्त्र समझ नहीं आता कि जब कई उत्पाद बनते हैं, तो लागत अपने आप नियंत्रित हो जाती है।

क्या था पूरा विवाद और 50 करोड़ का मानहानि केस?

दरअसल, यह विवाद तब गरमाया था जब बृजभूषण शरण सिंह ने बहराइच और गोंडा में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पतंजलि के घी और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता पर कड़े सवाल उठाए थे। उन्होंने कथित तौर पर बाबा रामदेव को मिलावटी उत्पादों का 'सम्राट' बताते हुए कहा था कि इतनी कम कीमत पर शुद्ध देसी गाय का घी मिलना संभव नहीं है। पूर्व सांसद ने लोगों को घर पर गाय-भैंस पालने की सलाह दी थी।

इन बयानों से ब्रांड की छवि और शेयर बाजार में कंपनी की साख को नुकसान पहुंचने का हवाला देते हुए 'पतंजलि फूड्स लिमिटेड' ने कड़ा रुख अपनाया था। कंपनी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा ठोक दिया था। कानूनी नोटिस मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने भी तीखे तेवर दिखाते हुए कहा था कि वे जेल जाने को तैयार हैं लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, अब दोनों शीर्ष नेताओं की सीधी मुलाकात और गिले-शिकवे दूर होने के बाद न सिर्फ जुबानी जंग थम गई है, बल्कि कानूनी विवाद के भी जल्द औपचारिक रूप से वापस लिए जाने की संभावना बन गई है।