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May 06 2026 04:28 pm

लोन चुकाने में की आनाकानी तो बैंक जब्त कर लेगा आपका घर RBI ने वसूली नियमों में किया बड़ा बदलाव

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India News Live, Digital Desk: अगर आपने बैंक से लोन लिया है और उसे चुकाने में लापरवाही बरत रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कर्ज वसूली (Loan Recovery) के नियमों को बेहद सख्त बनाने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय बैंक के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब लोन न चुकाने की स्थिति में बैंक आपकी गिरवी रखी हुई जमीन या मकान जैसी अचल संपत्ति (Immovable Property) पर सीधे कब्जा कर सकेंगे।

डिफॉल्टरों पर गिरेगी गाज, RBI का सख्त एक्शन

अक्सर देखा जाता है कि लोन डिफॉल्ट होने के बाद बैंक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे रहते हैं और वसूली में सालों लग जाते हैं। इसी प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए आरबीआई ने नया ड्राफ्ट पेश किया है। इसके तहत बैंकों को यह अधिकार मिलेगा कि जब वसूली के अन्य सभी रास्ते बंद हो जाएं, तो वे गिरवी रखी संपत्ति को अपने नाम करवा सकेंगे। इसे 'स्पेसिफाइड नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स' (SNFA) के तौर पर वर्गीकृत किया जाएगा।

7 साल के भीतर बेचनी होगी जब्त संपत्ति

आरबीआई ने इस प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण समय सीमा भी तय की है। बैंकों द्वारा कब्जे में ली गई किसी भी प्रॉपर्टी को वे अनिश्चित काल तक अपने पास नहीं रख पाएंगे। बैंक को ऐसी संपत्तियों को अधिकतम 7 साल के भीतर बेचना अनिवार्य होगा। इस समय सीमा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक जल्द से जल्द अपनी बकाया राशि वसूल सकें और उनकी बैलेंस शीट साफ रहे।

'फायर सेल' से बचेंगे बैंक, ग्राहकों को भी मिलेगी पारदर्शिता

विशेषज्ञों का मानना है कि 7 साल का समय पर्याप्त है। इससे बैंकों को जल्दबाजी में कम दाम पर संपत्ति बेचने (Fire Sale) की मजबूरी नहीं होगी। वे मार्केट रेट का इंतजार कर सकेंगे। वहीं, आरबीआई ने एक सख्त नियम यह भी जोड़ा है कि बैंक यह संपत्ति वापस उसी कर्जदार या उससे जुड़ी किसी भी पार्टी को नहीं बेच पाएंगे। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि डिफॉल्टर पिछले दरवाजे से अपनी ही संपत्ति वापस न पा सकें।

सुझावों के लिए 26 मई तक का समय

रिजर्व बैंक ने इस ड्राफ्ट प्रपोजल पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से 26 मई तक सुझाव मांगे हैं। यदि बैंक 7 साल के भीतर संपत्ति नहीं बेच पाता है, तो उसे एक अलग प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति को अपने फिक्स्ड एसेट्स में डालना होगा। यह कदम बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते एनपीए (NPA) को नियंत्रित करने और कर्जदारों में अनुशासन लाने के लिए उठाया गया है।