राजीव ठाकुर का छलका आंसू, बोले— एक ही कमरे में था सब कुछ, पब्लिक टॉयलेट जैसा लगता था घर
अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग और शानदार पंचलाइनों से करोड़ों दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करने वाले मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता राजीव ठाकुर (Rajiv Thakur) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 'द कपिल शर्मा शो' (The Kapil Sharma Show) से लेकर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज तक अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले राजीव आज भले ही आलीशान जिंदगी जी रहे हों, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक बेहद दर्दनाक और लंबा संघर्ष छुपा हुआ है। हाल ही में वैभव मुंजाल के एक टॉक शो (Podcast) में बातचीत के दौरान राजीव ठाकुर ने अपने बचपन के दिनों की उस खौफनाक तंगहाली और गरीबी का खुलासा किया है, जिसे सुनकर किसी भी व्यक्ति की आंखें नम हो जाएं।
पुरानी हिंदी फिल्मों जैसा था पारिवारिक संघर्ष: रातों-रात छिन गई थी छत
राजीव ठाकुर ने अपने अतीत के पन्नों को पलटते हुए बताया कि उनके परिवार की कहानी किसी सत्तर के दशक की मेलोड्रामेटिक हिंदी फिल्म जैसी रही है। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए साझा किया कि माता-पिता की शादी के ठीक बाद उनके पिता को पारिवारिक विवाद के कारण अचानक घर से बेदखल कर दिया गया था। इसके चलते उनका परिवार रातों-रात एक बेहद आलीशान और आरामदायक मकान से निकलकर सड़क पर आ गया और उन्हें एक बेहद छोटे और तंग कमरे में शरण लेनी पड़ी। राजीव ने बताया कि वे समाज के सामने अपने इन शुरुआती संघर्षों के बारे में बात करने से हमेशा बचते रहे हैं क्योंकि वे जख्म आज भी बहुत गहरे हैं।
जब एक ही कमरा बन गया पूरी दुनिया: 'पब्लिक टॉयलेट' जैसे हालात में बीते दिन
अपनी रहने की जगह की बदहाली का जिक्र करते हुए राजीव ठाकुर ने बताया कि वह एक अकेला कमरा ही उनके पूरे परिवार की दुनिया बन चुका था। वही एक कमरा उनका बेडरूम था, वही लिविंग रूम, वही किचन और उसी के एक कोने में बाथरूम भी बना हुआ था। उसी बेहद छोटे से दायरे में उनके माता-पिता के तीन बच्चे पैदा हुए और बड़े हुए। स्थिति इतनी विकट थी कि यदि परिवार का कोई एक सदस्य कमरे के भीतर नहा रहा होता था, तो बाकी के चार सदस्यों को मजबूरन घर के बाहर गली में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। राजीव ने रुंधे गले से कहा कि उस दौर में मानसिक स्थिति ऐसी हो गई थी कि मुझे अक्सर अपना घर किसी घर जैसा नहीं, बल्कि एक पब्लिक टॉयलेट जैसा महसूस होता था।
बैकस्टेज फूट-फूटकर रोते थे कॉमेडियन: दर्द को कॉमेडी मैटेरियल बनाने की मिली थी सलाह
राजीव ठाकुर ने इंडस्ट्री के एक कड़वे सच का खुलासा करते हुए कहा कि जब वे कॉमेडी के क्षेत्र में पैर जमा रहे थे, तब कई वरिष्ठ कलाकारों और विशेषज्ञों ने उन्हें सलाह दी थी कि वे अपने इस व्यक्तिगत दर्द और गरीबी को स्टैंड-अप कॉमेडी के मैटेरियल (Script) में बदल दें। लेकिन राजीव के लिए ऐसा करना नामुमकिन था। उन्होंने बताया कि जब भी वे मंच पर जाकर अपनी तंगहाली पर कोई जोक बनाने की कोशिश करते थे, तो उनकी आंखों के सामने बचपन की वह बेबसी और माता-पिता का रोता हुआ चेहरा सजीव हो जाता था। यही कारण था कि दर्शकों को हंसाने वाले राजीव कई बार शो शुरू होने से ठीक पहले बैकस्टेज (Backstage) जाकर फूट-फूटकर रोया करते थे और आंसू पोंछकर मंच पर परफॉर्म करते थे।
'लाफ्टर चैलेंज' से लेकर 'कंधार हाईजैक' तक का सफर: टीवी से लेकर ओटीटी पर मचाया तहलका
तमाम मुश्किलों और आंसुओं को मात देकर राजीव ठाकुर ने भारतीय मनोरंजन उद्योग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्हें सबसे पहले स्टार वन के मशहूर रियलिटी शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' (The Great Indian Laughter Challenge) से देशव्यापी पहचान मिली थी। इसके बाद उन्होंने 'कॉमेडी सर्कस' और 'द कपिल शर्मा शो' जैसे कल्ट कॉमेडी शोज के जरिए घर-घर में अपनी लोकप्रियता स्थापित की। टेलीविजन के अलावा राजीव ने पंजाबी सिनेमा में 'लाहोरिये' जैसी सुपरहिट फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर आई उनकी गंभीर ड्रामा सीरीज 'IC 814: द कंधार हाईजैक' (IC 814: The Kandahar Hijack) में उनके संजीदा अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई है।