तालिबान की पूरी लीडरशिप उड़ाने को तैयार पाक एक्सपर्ट का भड़काऊ बयान, अफगानिस्तान-पाकिस्तान टकराव ने पकड़ी खतरनाक रफ्तार

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India News Live,Digital Desk :अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब खुले आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य धमकियों तक पहुंच चुका है। इसी बीच पाकिस्तान के एक सुरक्षा विशेषज्ञ के बयान ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। टीवी डिबेट के दौरान पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा ने दावा किया कि यदि हालात काबू से बाहर हुए तो पाकिस्तान काबुल और कंधार को निशाना बनाने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस बयान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

टीवी बहस में दी गई कड़ी चेतावनी

पाकिस्तानी सुरक्षा विश्लेषक कमर चीमा ने कहा कि इस्लामाबाद अब “रेडलाइन” पार होने का इंतजार नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो तालिबान नेतृत्व पर सीधा एक्शन लिया जा सकता है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। बयान ऐसे समय आया है जब सीमा पार हमलों और आतंकी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच तल्खी चरम पर है।

सीमा पर बढ़ती सैन्य हलचल

Afghanistan और Pakistan के बीच डूरंड लाइन को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन हाल के महीनों में हालात और बिगड़े हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकी हमलों के लिए किया जा रहा है। वहीं काबुल प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सीमा के संवेदनशील इलाकों में दोनों ओर से सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। पाकिस्तान की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

तालिबान पर सीधा निशाना

Taliban की सत्ता में वापसी के बाद से पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पहले दोनों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब अविश्वास बढ़ता दिख रहा है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि काबुल प्रशासन पाकिस्तान विरोधी तत्वों पर कार्रवाई नहीं करता, तो इस्लामाबाद ‘टार्गेटेड ऑपरेशन’ का विकल्प चुन सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा

विश्लेषकों का मानना है कि अगर बयानबाजी वास्तविक कार्रवाई में बदलती है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य झड़प न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ाएगी।

क्या कूटनीति से सुलझेगा विवाद?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हालात को संभालने के लिए कूटनीतिक संवाद ही एकमात्र रास्ता है। अगर बयानबाजी और सैन्य विकल्पों पर जोर दिया गया, तो सीमा पर अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया की नजरें काबुल और इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं।