Pradosh Vrat 2025 : 17 नवंबर को शिवलिंग पर करें ये 7 अर्पण, बरसेगी महादेव की अपार कृपा

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India News Live,Digital Desk : प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन है। यह हर महीने की त्रयोदशी तिथि को आता है और इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले का समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करता है, उस पर महादेव की कृपा सदैव बनी रहती है। इस व्रत से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और आर्थिक उन्नति आती है।

नवंबर 2025 का दूसरा प्रदोष व्रत 17 नवंबर को पड़ रहा है। आइए जानते हैं इस दिन शिवलिंग पर कौन सी सात चीजें चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 7 पवित्र वस्तुएं

1. कच्चा दूध

शिवलिंग पर गाय का शुद्ध कच्चा दूध अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और धन से जुड़ी रुकावटें दूर होती हैं।
अगर यह दिन सोम प्रदोष व्रत का हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

2. दही

दही से अभिषेक करने पर जीवन में स्थिरता आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
यह उपाय नौकरी और व्यापार दोनों के लिए लाभकारी माना गया है।

3. शहद

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
इसके साथ ही यह उपाय कर्ज से मुक्ति दिलाने में भी सहायक है।

4. बिल्व पत्र

बिल्व पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र शिवलिंग पर उल्टा अर्पित करें।
यह उपाय जीवन से नकारात्मकता को भी दूर करता है।

5. गन्ने का रस

प्रदोष व्रत के दिन गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
यह उपाय सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में मदद करता है।

6. काले तिल

शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
इसके साथ ही रुका हुआ धन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

7. अक्षत (चावल)

शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।
यह उपाय गृहस्थ जीवन में सुख और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat 2025 Puja Ritual)

  1. प्रदोष काल से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. शिवलिंग पर क्रम से गंगाजल, दूध, दही, शहद और गन्ने का रस अर्पित करें।
  3. इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  4. बिल्व पत्र, भांग, धतूरा और फूल अर्पित करें।
  5. दीपक जलाकर शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
  6. अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर व्रत संपन्न करें।