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July 22 2026 03:31 pm

कर्नाटक में सियासी हलचल तेज: 3 जून को सीएम पद की शपथ ले सकते हैं डीके शिवकुमार, कैबिनेट में होगा बड़ा बदलाव

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India News Live,Digital Desk : कर्नाटक की राजनीति में चल रहे हाई-वोल्टेज ड्रामे का पटाक्षेप होने वाला है। राज्य की सत्ता के गलियारों से मिल रही बड़ी खबर के अनुसार, कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार आगामी 3 जून को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही 10 नए मंत्री भी पद और गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं, जबकि कैबिनेट का पूर्ण विस्तार 18 जून के बाद राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा।

सीएलपी बैठक के बाद होगा नामों का खुलासा

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की कवायद के बीच, कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। कर्नाटक विधान परिषद के चीफ विप सलीम अहमद ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट के स्वरूप, संभावित उप-मुख्यमंत्रियों के चयन और क्षेत्रीय व सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर अंतिम मुहर आलाकमान की सहमति से इसी बैठक के बाद लगेगी। माना जा रहा है कि आज देर शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद से ही नए नेतृत्व को लेकर सस्पेंस बना हुआ था।

कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरों की संभावना

डीके शिवकुमार की संभावित नई कैबिनेट में युवा और नए चेहरों को प्राथमिकता मिलने की पूरी उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं, जो राज्य प्रशासन में नई ऊर्जा और बदलाव का संकेत है। हालांकि, सिद्दारमैया के इस्तीफे के बाद भी उनका प्रभाव कम नहीं होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 'अहिंडा' (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) गठबंधन पर उनकी पकड़ अभी भी बरकरार है। कांग्रेस आलाकमान इस सामाजिक समीकरण को किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने देना चाहता, क्योंकि यही गठबंधन पार्टी की चुनावी जीत का आधार रहा है।

सत्ता के दो केंद्रों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती

सिद्दारमैया द्वारा राज्यसभा सीट का ऑफर ठुकराकर राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहने का निर्णय यह साफ करता है कि वे परदे के पीछे से अपनी ताकत बनाए रखेंगे। अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती डीके शिवकुमार के प्रशासनिक नियंत्रण और सिद्दारमैया के संगठनात्मक प्रभाव के बीच संतुलन बनाए रखने की है। डीके शिवकुमार के लिए असली चुनौती शपथ लेने के बाद शुरू होगी, जहां उन्हें न केवल प्रशासन पर अपनी पकड़ बनानी होगी, बल्कि सिद्दारमैया खेमे को समानांतर शक्ति के रूप में उभरने से भी रोकना होगा। आने वाले दिन कर्नाटक कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।