BREAKING:
July 12 2026 06:43 pm

तमिलनाडु में 'तमिल थाई वाझथु' पर फिर मचा सियासी घमासान: क्या प्रोटोकॉल और भावनाओं के बीच फंस गई है विजय सरकार

Post

India News Live,Digital Desk : तमिलनाडु में राज्य गीत 'तमिल थाई वाझथु' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। महज 11 दिनों के भीतर दूसरी बार इस मुद्दे ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। गुरुवार, 21 मई को लोक भवन में आयोजित नव-नियुक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में जब राष्ट्रगान के बाद राज्य गीत को तीसरे स्थान पर गाया गया, तो सहयोगी दलों और विपक्षी खेमों ने इसे 'तमिल भावनाओं' के खिलाफ बताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया।

क्या है पूरा विवाद?

तमिलनाडु की परंपरा रही है कि सरकारी कार्यक्रमों के प्रारंभ में 'तमिल थाई वाझथु' को सबसे पहले गाया जाता है। हालांकि, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण (10 मई) और अब मंत्रिमंडल विस्तार (21 मई) के दौरान इसे 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' के बाद तीसरे क्रम पर रखा गया।

सरकार और राज्यपाल कार्यालय की सफाई

विवाद बढ़ता देख TVK सरकार ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है। मंत्री आधव अर्जुन ने बताया कि राज्यपाल कार्यालय ने केंद्र सरकार के एक हालिया सर्कुलर का हवाला दिया है, जिसके चलते प्रोटोकॉल के तहत यह बदलाव किया गया। उन्होंने साफ किया कि यह एक मजबूरी की स्थिति थी जिसे टाला नहीं जा सकता था, लेकिन साथ ही आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी 'नई परंपरा' का पालन नहीं किया जाएगा और तमिल गीतों को उचित सम्मान दिया जाएगा।

सहयोगी और विपक्षी दलों का रुख

सहयोगी दल: CPI और माकपा जैसे वामपंथी सहयोगी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं, लेकिन राज्य की अस्मिता से जुड़े 'तमिल थाई वाझथु' को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। कांग्रेस ने भी इस घटना को 'अनुचित' करार देते हुए इसके पीछे भाजपा के प्रभाव का इशारा किया है।

विपक्ष (DMK): मुख्य विपक्षी दल DMK ने इसे मुख्यमंत्री विजय की 'नाकामी' करार दिया है। DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछली बार के आश्वासन के बावजूद सरकार अपनी ही संस्कृति की रक्षा करने में विफल रही है।

तमिल अस्मिता का सवाल

तमिलनाडु की राजनीति में भाषाई और सांस्कृतिक गौरव का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। 59 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस और नई TVK सरकार के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री विजय केंद्र के साथ समन्वय बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के भीतर 'तमिल अस्मिता' की रक्षा की जिम्मेदारी उनके गठबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।