PM मोदी ने की NDA राज्यमंत्रियों के साथ बड़ी समीक्षा बैठक: जयंत चौधरी समेत कई दिग्गज पहुंचे
राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक अहम समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री ने राज्य मंत्रियों (MoS) और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ लंबी बैठक कर उनके मंत्रालयों के कामकाज, प्रदर्शन और जनहित से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया।
हालांकि, इस बैठक को लेकर सरकार या एनडीए (NDA) गठबंधन की ओर से आधिकारिक रूप से कोई राजनीतिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसे जल्द होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि मंत्रियों के परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कई चेहरों को प्रमोट किया जा सकता है, जबकि कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
बैठक में कौन-कौन से प्रमुख नेता और मंत्री पहुंचे?
सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री की इस समीक्षा बैठक में सामाजिक न्याय, जनकल्याण, कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों के राज्यमंत्री और सहयोगी दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए:
जयंत चौधरी: राष्ट्रीय लोक दल (RLD) प्रमुख और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) के राज्यमंत्री।
प्रताप राव जाधव: शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और आयुष मंत्रालय व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री।
डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री।
रामदास आठवले: आरपीआई (ए) के प्रमुख और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री।
कमलेश पासवान: भाजपा सांसद और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री।
बैठक में मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों में शुरू की गई पहलों, केंद्रीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और समयबद्ध लक्ष्यों की प्रगति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रधानमंत्री ने सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
किन वजहों से कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को मिल रहा है बल?
केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाएं अचानक नहीं उठी हैं, बल्कि पिछले कुछ घटनाक्रमों ने इन कयासों को मजबूत आधार दिया है:
मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होना: केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने के बाद उन्होंने मंत्रिपरिषद (अल्पसंख्यक कार्य तथा मत्स्य, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री) से इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह, रेल व खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी उच्च सदन का कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नामित नहीं किया गया, जिससे इन रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता बनी हुई है।
संगठन में वापसी और नई जिम्मेदारियां: कुछ केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों और पार्टी संगठन में अहम भूमिकाएं सौंपी जा रही हैं, जिससे मंत्रिमंडल में नए समीकरणों के लिए जगह बन रही है।
शीर्ष स्तर पर मुलाकातों का दौर: इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकातों के बाद भी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं ने रफ्तार पकड़ी थी।
क्या होगा फेरबदल का मुख्य फोकस?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही कैबिनेट में फेरबदल का फैसला लेते हैं, तो उसका मुख्य केंद्र आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधना होगा। इसके साथ ही, सहयोगी दलों (TDP, JDU, RLD, शिवसेना आदि) के साथ गठबंधन को और मजबूत करने तथा नॉन-परफॉर्मिंग चेहरों की जगह ऊर्जावान व युवा चेहरों को मौका देने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के अन्य समूहों के साथ भी ऐसी समीक्षा बैठकें होने की संभावना है, जिसके बाद ही अंतिम फैसले की औपचारिक तस्वीर साफ हो सकेगी।