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October 23 2026 03:23 am

पितृ पक्ष में 21 पीपल के पत्तों से करें हनुमान जी का अचूक उपाय, सभी संकट और पितृ दोष होंगे दूर

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सनातन परंपरा में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय केवल पूर्वजों के तर्पण और पिंडदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समय कुंडली के गंभीर दोषों, शनि की साढ़ेसाती-ढैय्या और पितृ बाधा के निवारण के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के साथ-साथ सभी पितरों का वास होता है। वहीं, कलयुग के जाग्रत देवता संकटमोचन हनुमान जी की कृपा से हर प्रकार के संकट और अनिष्टकारी ग्रह प्रभाव शांत हो जाते हैं।

यदि आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ जाते हैं, घर में निरंतर कलह या आर्थिक तंगी बनी रहती है, तो पितृ पक्ष के मंगलवार या शनिवार को 21 पीपल के पत्तों से हनुमान जी का यह सिद्ध उपाय अवश्य करना चाहिए।

21 पीपल के पत्तों के उपाय की संपूर्ण विधि

इस प्रयोग को पितृ पक्ष के किसी भी मंगलवार, शनिवार या सर्वपितृ अमावस्या के दिन करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है:

1. अखंडित पत्तों का चयन

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और किसी प्राचीन पीपल के वृक्ष के पास जाएं।

पीपल के वृक्ष से 21 पूर्ण एवं स्वस्थ पत्ते तोड़ें। ध्यान रखें कि पत्ते कहीं से कटे-फटे, सूखे या खंडित न हों। (पत्ते तोड़ने से पहले वृक्ष से हाथ जोड़कर आज्ञा मांगें)।

इन सभी 21 पत्तों को घर लाकर शुद्ध गंगाजल मिले जल से धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।

2. श्रीराम नाम का अंकन

चमेली के तेल में थोड़ा सा नारंगी सिंदूर घोल लें।

अनार की कलम, दूर्वा या अनामिका उंगली (Ring Finger) से प्रत्येक पीपल के पत्ते पर श्रद्धापूर्वक 'श्री राम' लिखें।

लिखते समय मन ही मन श्री राम और हनुमान जी के नामों का स्मरण करते रहें।

3. माला का निर्माण व अर्पण

मौली (कलावा) या लाल सूती धागे की सहायता से इन 21 पत्तों को पिरोकर एक सुंदर माला तैयार करें।

अब किसी नजदीकी हनुमान मंदिर जाएं और संकटमोचन के विग्रह को यह माला अपने हाथों से अर्पित करें।

यदि मंदिर में सीधे माला चढ़ाने की अनुमति न हो, तो पुजारी जी के माध्यम से हनुमान जी के चरणों या गले में यह माला पहनाएं।

4. पाठ व क्षमा प्रार्थना

मंदिर में बैठकर हनुमान जी के सामने चमेली के तेल या गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

वहीं बैठकर एकाग्रचित्त होकर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का 3 या 7 बार पाठ करें।

अंत में अपने पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की शांति और अपने जीवन के समस्त संकटों, कर्जों व रुकावटों को दूर करने की प्रार्थना करें।

इस उपाय से मिलने वाले चमत्कारी लाभ

पितृ दोष से शांति: पीपल के माध्यम से हनुमान जी की शरण में जाने से पूर्वजों की नाराजगी शांत होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

आर्थिक बाधाओं और कर्ज से मुक्ति: व्यापार में घाटा या रुका हुआ धन वापस मिलने के रास्ते खुलते हैं और आमदनी के नए स्रोत बनते हैं।

शनि और राहु-केतु के दुष्प्रभावों में कमी: हनुमान जी की कृपा से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु की पीड़ा तुरंत शांत होती है।

रोग और अज्ञात भय का नाश: परिवार के सदस्यों की लंबी बीमारियां और अकारण लगने वाले भय से छुटकारा मिलता है।