"पाकिस्तान की मध्यस्थता अमेरिका के लिए शर्मिंदगी": एक्सपर्ट ने ट्रंप को घेरा, कहा- भारत होता सबसे बेहतर विकल्प

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका और ईरान को एक मेज पर लाने के लिए पाकिस्तान की 'बिचौलिए' वाली भूमिका पर दुनिया भर के विशेषज्ञों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रसिद्ध अमेरिकी थिंक टैंक 'अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट' के सीनियर फेलो माइकल रुबिन ने इस कदम को अमेरिका के लिए न केवल अपमानजनक, बल्कि आत्मघाती बताया है। रुबिन का मानना है कि ट्रंप प्रशासन को इस संवेदनशील काम के लिए पाकिस्तान के बजाय भारत पर भरोसा करना चाहिए था, जो एक जिम्मेदार और अधिक उपयुक्त राष्ट्र है।

"गंदगी फैलाने वाले को ही इनाम दे रहा वाशिंगटन"

'संडे गार्जियन' में लिखे अपने तीखे लेख में माइकल रुबिन ने पाकिस्तान के इतिहास को खंगालते हुए ट्रंप सरकार को आईना दिखाया है। उन्होंने लिखा कि यह विडंबना ही है कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान ने ही ईरान को परमाणु शक्ति बनाने में मदद की थी, और आज अमेरिका उसी 'अपराधी' को मध्यस्थ बनाकर इनाम दे रहा है। रुबिन ने कहा, "वाशिंगटन उसी गंदगी को साफ करने के लिए इस्लामाबाद को पैसे और रसूख दे रहा है, जो खुद पाकिस्तान के भ्रष्टाचार ने पैदा की थी।"

भारत होता ज्यादा भरोसेमंद और सही विकल्प

रुबिन ने अपने लेख में भारत का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि नई दिल्ली इस भूमिका के लिए कहीं अधिक परिपक्व और संतुलित थी। उन्होंने भारतीय कूटनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को आत्ममंथन करना चाहिए कि कैसे पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने में सफल रहा, जबकि भारत की विश्वसनीयता कहीं अधिक है। रुबिन के मुताबिक, "भारत को सैन्य रूप से तैयार रहना चाहिए, लेकिन उसे यह भी पूछना चाहिए कि पाकिस्तान विदेश मंत्रालय को मात देने में कैसे कामयाब रहा।"

ओसामा से लेकर आतंकवाद तक: रुबिन की तल्ख टिप्पणियां

विशेषज्ञ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर हमला करते हुए इसे 'किंडरगार्टन में चाइल्ड मोलेस्टर को नौकरी देने' जैसा खतरनाक बताया। उन्होंने याद दिलाया कि:

ओसामा बिन लादेन: जब अमेरिकी सेना ने लादेन को एबटाबाद में मारा था, तब पाकिस्तान सरकार ने इसे 'गहरी निराशा' बताया था।

अमेरिका विरोधी मानसिकता: रुबिन के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक अमेरिका-विरोधी और यहूदी-विरोधी देशों में से एक है।

विफलता की पुनरावृत्ति: उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान पर भरोसा करना वैसी ही गलती है जैसी अफगानिस्तान, गाजा और यमन में हुई थी।

अंतिम चेतावनी: 22 अप्रैल को खत्म हो रही है डेडलाइन

यह कूटनीतिक विवाद ऐसे समय में गहराया है जब 22 अप्रैल को सीजफायर की अवधि समाप्त हो रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को कड़े लहजे में कहा कि उनके वार्ताकार सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे, लेकिन यदि ईरान ने प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं किया, तो वे ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को पूरी तरह तबाह कर देंगे। हालांकि, खबरों के मुताबिक ईरान ने दूसरे दौर की इस वार्ता में शामिल होने से पहले ही इनकार कर दिया है, जिससे युद्ध का खतरा फिर से मंडराने लगा है।