दुनिया पर मंडराया तेल संकट: '6 महीने से भी ज्यादा खिंचेगी किल्लत', अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की इस चेतावनी ने बढ़ाई टेंशन; क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल...

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India News Live,Digital Desk : वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने तेल की सप्लाई को लेकर एक बड़ी और डराने वाली चेतावनी जारी की है। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति को सामान्य होने में अभी 6 महीने से भी ज्यादा का लंबा वक्त लग सकता है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दुनिया भर के बाजारों में खलबली मच गई है और कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।

सप्लाई चेन में आई बड़ी रुकावट

IEA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति व्यवस्था कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में की गई कटौती ने बाजार के संतुलन को बिगाड़ दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जो सप्लाई गैप बना है, उसे भरने के लिए किए जा रहे प्रयास अभी नाकाफी हैं। सप्लाई चेन में आए इस व्यवधान के कारण रिफाइनरीज तक कच्चा तेल पहुंचने में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर स्टॉक पर पड़ रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो विकसित देशों के साथ-साथ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा।

मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता फासला

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपनी चेतावनी में इस बात पर जोर दिया है कि दुनिया भर में तेल की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन उस अनुपात में उत्पादन और सप्लाई नहीं बढ़ पा रही है। सर्दियों के मौसम और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से तेल की खपत और बढ़ने की उम्मीद है। एजेंसी के मुताबिक, मौजूदा इन्वेंट्री (स्टॉक) निचले स्तर पर पहुंच गई है और इसे फिर से भरने में कम से कम दो तिमाहियों का समय लगेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 6 महीने की यह समयसीमा एक न्यूनतम अनुमान है और यदि स्थितियां और बिगड़ती हैं, तो यह संकट साल के अंत तक भी खिंच सकता है।

आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

तेल की सप्लाई में इस लंबी बाधा का सीधा मतलब है कीमतों में बढ़ोतरी। जब कच्चे तेल की सप्लाई कम होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'ब्रेंट क्रूड' के दाम ऊपर भागते हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, यह खबर चिंताजनक है। यदि सप्लाई का संकट 6 महीने तक बरकरार रहता है, तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में संशोधन की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा, माल ढुलाई महंगी होने के कारण रोजमर्रा की चीजों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी महंगाई का करंट लग सकता है।