दुनिया पर मंडराया महायुद्ध का खतरा: ईरान ने होर्मुज की घेराबंदी कर 'तेल' को बनाया हथियार...

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी बारूदी जंग अब समुद्र के रास्ते दुनिया की अर्थव्यवस्था को डुबाने की ओर बढ़ रही है। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को एक खतरनाक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए तेल की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को बाधित करना शुरू कर दिया है। इस कदम के बाद वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है और तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल की आशंका गहरा गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना दुनिया का नया 'टेंशन पॉइंट'

होर्मुज जलडमरूमध्य वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए इस रास्ते पर सख्त पहरा बिठा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरानी नौसेना ने इस मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इजरायल और अमेरिका के बढ़ते दबाव के जवाब में ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

अमेरिका और इजरायल की जवाबी तैयारी से खौफ

ईरान के इस कदम ने व्हाइट हाउस और यरूशलेम की रातों की नींद उड़ा दी है। अमेरिका ने अपने पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) को अलर्ट पर रखा है और होर्मुज के पास युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है। इजरायल की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान इस जलमार्ग का उपयोग न केवल तेल की सप्लाई रोकने के लिए, बल्कि पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने के लिए एक 'रणनीतिक लीवर' के रूप में कर रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से छोटी सी भी चूक हुई, तो यह तनाव एक पूर्ण विकसित महायुद्ध में तब्दील हो सकता है, जिसकी आंच पूरी दुनिया को झुलसाएगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा और गहरा असर

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या वहां तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा। चूंकि यह मार्ग ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील है, इसलिए आपूर्ति में जरा सी भी बाधा वैश्विक मंदी को न्योता दे सकती है। कई अंतरराष्ट्रीय टैंकर कंपनियों ने पहले ही इस रास्ते से अपने जहाज ले जाने से मना कर दिया है या फिर भारी बीमा प्रीमियम की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र और बड़े वैश्विक शक्तियों पर टिकी हैं कि क्या वे इस 'वाटर वॉर' को रोक पाएंगे या फिर ऊर्जा की यह किल्लत दुनिया को एक नए संकट में झोंक देगी।