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September 23 2026 04:31 am

NSE IPO GMP Latest: ₹22,569 करोड़ के मेगा इश्यू पर 5.71 गुना बोलियां, गिरकर ₹51 हुआ जीएमपी, 24 सितंबर को होगी ऐतिहासिक लिस्टिंग

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भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का ₹22,569 करोड़ का मेगा आईपीओ आखिरकार निवेशकों की भारी मांग के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। प्राथमिक बाजार में बिडिंग के अंतिम दिन तक संस्थागत और गैर-संस्थागत निवेशकों ने एक्सचेंज के शेयरों को हाथों-हाथ लिया, जिसके चलते अंतिम कारोबारी सत्र में इस इश्यू को 5.71 गुना समग्र सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। हालांकि, प्राथमिक बाजार में इस जबरदस्त मांग के बावजूद अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में सुस्ती का माहौल देखा जा रहा है। 22 सितंबर 2026 को एनएसई आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) गिरकर ₹51 के स्तर पर दर्ज किया गया। ग्रे मार्केट के इस ताजा संकेत के आधार पर शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत ₹1,836 के आसपास आंकी जा रही है। दलाल स्ट्रीट के विश्लेषकों और खुदरा निवेशकों की नजरें अब आगामी 24 सितंबर 2026 पर टिकी हैं, जब एनएसई के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध होकर औपचारिक ट्रेडिंग की शुरुआत करेंगे।

5.71 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बना ₹90,300 करोड़ की पूंजी का अभूतपूर्व रिकॉर्ड

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) द्वारा जारी आधिकारिक और अंतिम संकलित आंकड़ों के अनुसार, एनएसई के सार्वजनिक निर्गम को बाजार से जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली। बिक्री के लिए पेश किए गए कुल 8.86 करोड़ इक्विटी शेयरों के मुकाबले निवेशकों की ओर से कुल 50.58 करोड़ शेयरों के लिए वैध बोलियां प्राप्त हुईं। इस भारी मांग के चलते पूरे इश्यू ने प्राथमिक बाजार से लगभग ₹90,300 करोड़ की संचयी मांग पैदा कर दी, जो अपने आप में भारतीय बाजार की तरलता और मजबूती को दर्शाता है। यह आईपीओ बोली प्रक्रिया के दूसरे ही दिन पूरी तरह सब्सक्राइब होकर शत-प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुका था। विभिन्न निवेशक श्रेणियों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा सर्वाधिक 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों (NII/HNI) की श्रेणी में 6.55 गुना बोलियां लगाई गईं। आम खुदरा निवेशकों (RII) की बात करें तो उनका आरक्षित हिस्सा 1.39 गुना भरा।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ: एलआईसी को पछाड़ा, हुंडई के बाद दर्ज किया नाम

एनएसई का ₹22,569 करोड़ का यह सार्वजनिक निर्गम भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ बनकर उभरा है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में आया दक्षिण कोरियाई ऑटोमोबाइल दिग्गज हुंडई मोटर इंडिया का ₹27,870 करोड़ का आईपीओ देश का अब तक का सबसे विशालकाय आईपीओ बना हुआ है। आकार के मामले में एनएसई ने वर्ष 2022 में आए लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के ₹21,000 करोड़ के पिछले ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, म्यूचुअल फंड्स में रिकॉर्ड एसआईपी प्रवाह और दैनिक डेरिवेटिव्स व कैश टर्नओवर में एक्सचेंज के एकाधिकार ने इस निर्गम को घरेलू और विदेशी फंड प्रबंधकों के बीच अत्यधिक आकर्षक बना दिया।

 ₹48 से ₹310 के बीच रहा जीएमपी का उतार-चढ़ाव: लिस्टिंग गेन को लेकर सतर्कता

प्राथमिक बाजार में मजबूत बोलियों के विपरीत समानांतर ग्रे मार्केट में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। पिछले 19 कारोबारी सत्रों के ऐतिहासिक रुझान पर नजर डालें तो एनएसई का जीएमपी ₹48 के निचले स्तर से लेकर ₹310 के उच्चतम स्तर के बीच झूलता रहा है। 22 सितंबर 2026 को इसका प्रीमियम लुढ़ककर ₹51 प्रति शेयर पर आ गया। इश्यू के लिए निर्धारित ₹1,700 से ₹1,785 के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर ₹1,785 पर यदि ₹51 का प्रीमियम जोड़ा जाए, तो संभावित लिस्टिंग भाव ₹1,836 प्रति शेयर बनता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा ग्रे मार्केट संकेतों के मुताबिक लिस्टिंग के दिन लगभग 2.85 से 3 प्रतिशत के मामूली लिस्टिंग गेन की संभावना दिख रही है। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि ग्रे मार्केट पूरी तरह से अनियंत्रित और सट्टेबाजी आधारित धारणा पर काम करता है, इसलिए निवेशकों को लिस्टिंग के दिन वास्तविक मांग, संस्थागत वॉल्यूम और एक्सचेंज की मूलभूत कमाई के आधार पर ही मूल्यांकन करना चाहिए।

 100% ऑफर फॉर सेल: मौजूदा शेयरधारकों की जेब में जाएगी ₹22,569 करोड़ की पूरी राशि

वित्तीय संरचना के लिहाज से एनएसई का यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित है। इसके अंतर्गत एक्सचेंज के मौजूदा और पुराने शेयरधारकों—जिनमें प्रमुख घरेलू वित्तीय संस्थान, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और शुरुआती वेंचर फंड शामिल हैं—ने अपने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की द्वितीयक बिक्री की है। इस इश्यू में कंपनी द्वारा कोई नया फ्रेश इक्विटी शेयर जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण जुटाई गई पूरी ₹22,569 करोड़ की शुद्ध राशि सीधे बिक्री करने वाले शेयरधारकों के बैंक खातों में जाएगी और एक्सचेंज के बैलेंस शीट या रिजर्व में कोई नई पूंजी नहीं जुड़ेगी। ₹1,785 के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का समग्र बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹4.42 लाख करोड़ (लगभग 53 अरब डॉलर) आंका गया है, जो इसे दुनिया के शीर्ष मूल्यवान एक्सचेंज ऑपरेटरों की प्रतिष्ठित लीग में शामिल करता है।

 24 सितंबर को ऐतिहासिक लिस्टिंग: प्रतिद्वंद्वी बीएसई के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड होगा शेयर

सेबी के निर्धारित नियमों और हितों के टकराव से बचने के कानूनी प्रावधानों के तहत कोई भी स्टॉक एक्सचेंज स्वयं के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों को सूचीबद्ध नहीं कर सकता। इसी नियम के तहत नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयर 24 सितंबर 2026 को अपने एकमात्र सूचीबद्ध प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होंगे। बाजार के दिग्गज मान रहे हैं कि लिस्टिंग के बाद एनएसई का शेयर संस्थागत पोर्टफोलियो का अनिवार्य हिस्सा बनेगा, क्योंकि भारत के 90 प्रतिशत से अधिक कैश इक्विटी टर्नओवर और लगभग 99 प्रतिशत डेरिवेटिव वॉल्यूम पर एनएसई का पूर्ण वर्चस्व कायम है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक्सचेंज का बढ़ता ऑपरेटिंग मार्जिन, डेटा फीड रेवेन्यू और भारत की बढ़ती वित्तीय साक्षरता एक मजबूत बुनियादी आधार प्रदान करती है।