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September 23 2026 11:36 pm

नीतीश कुमार के बेटे निशांत बनारस से करेंगे यूपी चुनाव का शंखनाद; 60 सीटों पर जेडीयू की तैयारी

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उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू ने भी उत्तर प्रदेश के रण में पूरी ताकत से उतरने का मन बना लिया है। पार्टी की इस बार की चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा आकर्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार होंगे। निशांत आगामी 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) से जेडीयू के चुनावी अभियान का शंखनाद करने जा रहे हैं। बिहार की सक्रिय राजनीति में आने के बाद राज्य के बाहर निशांत कुमार का यह पहला बड़ा और औपचारिक राजनीतिक दौरा होगा।

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जेडीयू नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को धार देने के लिए धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम वाराणसी को चुना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 25 अक्टूबर को बनारस में एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से पार्टी पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम में निशांत कुमार के साथ पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा सहित बिहार और दिल्ली के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। इस जनसभा के जरिए जेडीयू न केवल उत्तर प्रदेश में अपने विस्तार का संदेश देगी, बल्कि निशांत को पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और युवा चेहरे के तौर पर राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की भी योजना है।

60 सीटों पर जेडीयू की नजर: पूर्वांचल के कुर्मी-कुशवाहा बेल्ट पर फोकस

पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के अनुसार, जेडीयू उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की ठोस तैयारी कर रही है। पार्टी का मुख्य फोकस बिहार से सटे पूर्वांचल के जिलों पर है।

विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां कुर्मी (पटेल) और कुशवाहा (मौर्या/शाक्य/सैनी) मतदाताओं की तादाद निर्णायक है। वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ और बस्ती जैसे जिलों में जेडीयू अपनी सामाजिक और जातिगत ताकत को आजमाने की रणनीति पर काम कर रही है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल का कहना है कि पार्टी संगठन सभी 60 सीटों पर बूथ स्तर तक अपनी कमेटियां तैयार कर रहा है।

एनडीए गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की आस

हालांकि जेडीयू केंद्र और बिहार में एनडीए (NDA) की प्रमुख घटक दल है, इसलिए पार्टी की पहली प्राथमिकता उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ना है।

जेडीयू प्रवक्ताओं और नेताओं का कहना है कि आगामी महीनों में सीट बंटवारे को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भाजपा के केंद्रीय कमान से बातचीत होगी। पार्टी को उम्मीद है कि एनडीए गठबंधन में उसे सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी। हालांकि, पार्टी नेताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर गठबंधन में सहमति नहीं बनी, तो संगठन अपने बलबूते अकेले चुनाव मैदान में उतरने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहेगा।

2022 का कड़वा सच: 27 सीटों पर लड़ी, 26 पर जमानत जब्त

उत्तर प्रदेश का चुनावी इतिहास जेडीयू के लिए कभी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू ने भाजपा के साथ गठबंधन की पूरी कोशिश की थी। जब बात नहीं बनी, तो पार्टी ने अकेले 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

उस चुनाव में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था:

जेडीयू एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी।

27 में से 26 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

पूरे प्रदेश में पार्टी को मात्र 0.11 प्रतिशत वोट ही मिले थे।

क्या निशांत कुमार बदल पाएंगे जेडीयू की किस्मत?

2022 के निराशाजनक आंकड़ों के बाद 2027 के लिए जेडीयू का यह नया दांव काफी अहम माना जा रहा है। अपना दल (सोनेलाल) की अनुप्रिया पटेल और समाजवादी पार्टी के कुर्मी-पिछड़े नेताओं के बीच जेडीयू के लिए पूर्वांचल में जगह बनाना आसान नहीं होगा।

लेकिन नीतीश कुमार की स्वच्छ छवि, उनके विकास के मॉडल और अब युवा चेहरे के तौर पर निशांत कुमार की एंट्री से जेडीयू को उम्मीद है कि वह यूपी के कुर्मी बहुल इलाकों में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकती है। 25 अक्टूबर को बनारस में होने वाला यह कार्यक्रम तय करेगा कि यूपी की राजनीति में जेडीयू की इस नई पारी को जनता का कितना साथ मिलता है।