NITI Aayog's big roadmap : असंगठित क्षेत्र के कामगारों की आमदनी और उत्पादकता बढ़ाने का प्लान

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India News Live,Digital Desk : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों के दौर में अक्सर यह चर्चा होती है कि पेशेवरों को कितना नुकसान या लाभ होगा। लेकिन नीति आयोग की नजर एक ऐसे क्षेत्र पर गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था का 90 प्रतिशत कार्यबल और 50 प्रतिशत GDP देता है – यानी असंगठित क्षेत्र।

नीति आयोग के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र के 49 करोड़ कामगारों को एआई और अन्य तकनीक के साथ सक्षम बनाया जाए, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकते हैं और विकास का मुख्य इंजन साबित हो सकते हैं।

इस दृष्टि से आयोग ने “डिजिटल श्रमसेतु” नामक राष्ट्रीय मिशन के साथ केंद्र सरकार को रोडमैप सौंपा है। इसमें वर्ष 2035 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर और वर्ष 2047 तक लक्ष्य के रूप में तय किया गया है।

असंगठित क्षेत्र की चुनौतियां

नीति आयोग के CEO बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि निर्माण, कपड़ा, खाद्य सेवाएं, देखभाल और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक कम उत्पादकता वाले असुरक्षित माहौल में काम कर रहे हैं। आयोग ने इस क्षेत्र में पांच बड़ी चुनौतियां चिन्हित की हैं:

  1. वित्तीय असुरक्षा
  2. सीमित बाजार पहुंच
  3. कौशल की कमी
  4. अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा
  5. कम उत्पादकता

रोडमैप में बताया गया है कि AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और इमर्जिव लर्निंग जैसी तकनीकें इन बाधाओं को दूर कर सकती हैं।

डिजिटल श्रमसेतु मिशन: कामगार-केंद्रित योजना

इस मिशन में सरकार, उद्योग और समाज के हितधारकों को एक मंच पर लाने की योजना है।
मुख्य कदमों में शामिल हैं:

  • मिशन चार्टर बनाना
  • अलग नोडल निकाय की स्थापना
  • मेक इन इंडिया के तहत उपकरणों का स्थानीय निर्माण
  • श्रमिक-केंद्रित डाटा सुरक्षा लागू करना

राज्यों को भी इस मिशन के तहत मिशन मोड पर कार्यक्रम शुरू करने होंगे। प्रस्ताव है कि इस मिशन की शीर्ष कार्यकारी समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करें, जिसमें प्रमुख मंत्रालय और हितधारक शामिल होंगे।

क्षमता वृद्धि के लिए लक्ष्य बिंदु

श्रेणीवर्तमान स्थिति2035 का लक्ष्य2047 का लक्ष्य
प्रति व्यक्ति आय₹1,59,545₹4,87,467₹12,85,243
महिला भागीदारी15%25%42%
सामाजिक सुरक्षा कवरेज48%80%100%
उत्पादकता (₹ प्रति घंटा)443.191,329.564,343.24

नीति आयोग का मानना है कि सही तकनीक, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भारत के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं।

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