परमाणु समझौते की राह में नया रोड़ा! ईरान ने यूरेनियम देश से बाहर भेजने से किया इनकार
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि देश का समृद्ध यूरेनियम भंडार किसी भी हाल में ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। यह फैसला अमेरिका की उस मुख्य मांग को सीधे तौर पर खारिज करता है, जिसे वाशिंगटन किसी भी शांति समझौते की अनिवार्य शर्त मान रहा था।
ईरान का कड़ा रुख: 'सुरक्षा सर्वोपरि'
ईरानी सत्ता के गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, वहां के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के बीच इस बात पर आम सहमति है कि अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण छोड़ना ईरान को भविष्य में अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों के प्रति अधिक असुरक्षित बना देगा। तेहरान का मानना है कि परमाणु सामग्री पर अपनी पकड़ बनाए रखना उसकी रक्षात्मक रणनीति का अहम हिस्सा है।
क्या फंसा है पेंच?
अमेरिकी शर्त: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को आश्वस्त किया था कि किसी भी शांति समझौते में ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को देश से बाहर निकालना एक अनिवार्य क्लॉज होगा।
नेतन्याहू की जिद: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान से यूरेनियम भंडार को पूरी तरह हटाया नहीं जाता, प्रॉक्सी मिलिशिया का समर्थन बंद नहीं होता और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को नष्ट नहीं किया जाता, तब तक युद्ध को समाप्त नहीं माना जाएगा।
ईरान का अविश्वास: ईरान को संदेह है कि अमेरिका का यह दबाव केवल उसे कमजोर करने का एक कूटनीतिक जाल है। ईरानी नेताओं का कहना है कि वे युद्ध का स्थायी समाधान और सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं, न कि परमाणु क्षमता का पूरी तरह त्याग।
ट्रंप की अगली चाल क्या होगी?
इस घटनाक्रम ने राष्ट्रपति ट्रंप के लिए स्थिति को बेहद पेचीदा बना दिया है। एक तरफ ट्रंप युद्ध को टालने और कूटनीति का उपयोग करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी प्रमुख परमाणु शर्तों को ईरान ने सिरे से नकार दिया है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत का यह रास्ता बंद होता है, तो मिडिल ईस्ट में फिर से सैन्य तनाव का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, ट्रंप ने हाल ही में कुछ दिनों के 'इंतजार' का संकेत देकर फिलहाल बड़े हमले को टाला है, लेकिन यूरेनियम मुद्दे पर बढ़ती तकरार शांति वार्ता को एक नए गतिरोध की ओर धकेल रही है।
परमाणु भंडार का गणित
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास इस्फहान और नतांज के केंद्रों में अभी भी पर्याप्त मात्रा में समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। ईरान का तर्क है कि उसे अपने चिकित्सा और अनुसंधान रिएक्टरों के लिए इसकी आवश्यकता है, जबकि पश्चिमी देशों को डर है कि इस भंडार का उपयोग भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है।