यूएन महासभा में नेतन्याहू का भाषण और बड़े पैमाने पर बहिष्कार
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-27 15:15:00
India News Live, Digital Desk: इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। जब वे हमास और गाजा में जारी संघर्ष पर भाषण देने के लिए मंच पर आए, तो 50 से अधिक देशों के राजनयिक ने विरोध स्वरूप हॉल छोड़ दिया।
हॉल में मौजूद अरब, मुस्लिम, यूरोपीय और अफ्रीकी देशों के 100 से ज्यादा राजनयिक ने एक साथ बाहर जाने का निर्णय लिया, जिससे हॉल आधे से ज़्यादा खाली दिखाई दिया। हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सीटें नहीं छोड़ीं, और कुछ अन्य देशों के राजनयिकों ने तालियाँ बजाकर नेतन्याहू का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की।
हमास के खिलाफ सख्त रुख दोहराया
अपने भाषण में नेतन्याहू ने एक बार फिर गाजा पट्टी से हमास को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प जताया। उनका कहना था कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक हमास का सफाया नहीं हो जाता। उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद गाजा को आतंकवादियों से मुक्त कराना है।
नेतन्याहू ने हमास को चेतावनी भी दी: यदि वे आत्मसमर्पण करें, हथियार डालें और इज़राइली बंधकों को रिहा करें, तो स्थिति को शांति से सुलझाया जा सकता है, अन्यथा गाजा का पूर्ण नियंत्रण इज़राइल लेगा। उन्होंने दावा किया कि उनका भाषण गाजा में लाउडस्पीकर और इज़राइली खुफिया एजेंसियों के माध्यम से फ़ोन पर लोगों तक पहुँचाया गया।
वैश्विक विरोध और फिलिस्तीन को मान्यता
गाजा में इज़राइल की कार्रवाई ने दुनिया भर में आलोचना को जन्म दिया है। इसी विरोध के तहत ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन सहित 10 देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। नेतन्याहू ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना हमास के लिए एक पुरस्कार जैसा होगा।