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September 23 2026 03:36 am

नागालैंड की फिल्म 'अंग' ने जीता प्लेटफॉर्म प्राइज, ऑस्कर 2027 के लिए सीधे हुई क्वालीफाई

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भारतीय सिनेमा और पूर्वोत्तर के सांस्कृतिक फलक के लिए वैश्विक मंच से एक अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) 2026 में नागालैंड की पृष्ठभूमि पर आधारित स्वतंत्र फीचर फिल्म 'अंग' (Angh) ने प्रतिष्ठित 'प्लेटफॉर्म प्राइज' (Platform Prize) अपने नाम कर लिया है। निर्देशक तेजा रियो (Theja Rio) के निर्देशन में बनी यह पहली फीचर फिल्म है। इस ऐतिहासिक जीत का सबसे बड़ा पहलू यह है कि नए नियमों के तहत इस फेस्टिवल का शीर्ष प्लेटफॉर्म अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म को सीधे 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर 2027 की 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म' श्रेणी के लिए स्वतः पात्रता (Direct Qualification for Consideration) मिल गई है। किसी पूर्वोत्तर भारतीय फिल्म का बिना किसी औपचारिक घरेलू चयन के सीधे ऑस्कर के इस पड़ाव तक पहुंचना अपने आप में अभूतपूर्व उपलब्धि माना जा रहा है।

जूरी ने क्यों चुना 'अंग' और कैसे मिली ऑस्कर 2027 में सीधी एंट्री

टोरंटो फिल्म फेस्टिवल का 'प्लेटफॉर्म' सेक्शन फेस्टिवल का एकमात्र जूरी-आधारित मुख्य मुकाबला होता है, जिसमें दुनिया भर के चुनिंदा और अद्वितीय निर्देशकीय दृष्टि वाले सिनेमा को शामिल किया जाता है। इस साल इस प्रतियोगिता में वैश्विक स्तर पर 12 फिल्में चुनी गई थीं, जिनमें 'अंग' एकमात्र भारतीय फिल्म थी। फेस्टिवल की अंतरराष्ट्रीय जूरी ने 'अंग' को उसके मौलिक दृष्टिकोण, बेजोड़ सिनेमैटोग्राफी और विलुप्त होती दुनिया के भावनात्मक व मानवीय चित्रण के लिए सर्वोच्च सम्मान दिया। जूरी ने फिल्मकार तेजा रियो के साहस, निर्देशन क्षमता और संवेदनशीलता की खुले दिल से सराहना की।

अकादमी अवॉर्ड्स (Oscars) के नए प्रावधानों के अनुसार, टीआईएफएफ के प्लेटफॉर्म प्राइज विजेता को 'सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म' की रेस में भाग लेने के लिए अपने मूल देश के आधिकारिक नामांकन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसका अर्थ यह हुआ कि फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा भेजी जाने वाली आधिकारिक प्रविष्टि के समानांतर, 'अंग' सीधे ऑस्कर चयन समिति के विचारार्थ अपनी स्वतंत्र जगह बना चुकी है।

1960 के नागालैंड की दास्तान: पिता, पुत्र और परंपरा का द्वंद्व

फिल्म 'अंग' की कहानी 1960 के दशक के पूर्वार्ध में भारत-म्यांमार (बर्मा) सीमा के पास स्थित नागालैंड के एक सुदूर गांव में बुनी गई है। कहानी का मुख्य पात्र 'अंगबा' है, जो अपने वीरान हो चुके गांव का अंतिम जीवित 'अंग' (कोन्याक नागा जनजाति में गांव का पारंपरिक मुखिया या राजा) है। जब गांव के अधिकांश लोग नई व्यवस्था और बदलावों के चलते गांव छोड़कर चले जाते हैं, तब अंगबा अपनी बीमार पत्नी और गूंगे बेटे के साथ अपनी सदियों पुरानी पैतृक मान्यताओं, अनुष्ठानों और परंपराओं को सहेजने के लिए वहीं डटा रहता है।

कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब इलाके में एक अमेरिकी क्रिश्चियन मिशनरी का आगमन होता है, जिसका किरदार बाफ्टा विजेता स्कॉटिश अभिनेता डगलस हेनशॉल ने निभाया है। मिशनरी के आने के बाद गांव में धर्म परिवर्तन और नए तौर-तरीकों का दौर शुरू होता है। जहां पिता अपनी प्राचीन जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की जद्दोजहद करता है, वहीं उसका युवा बेटा नए जीवन, आधुनिक सुख-सुविधाओं और मिशनरी की व्यवस्था की ओर आकर्षित होने लगता है। यह फिल्म किसी सीधे टकराव के बजाय बहुत सूक्ष्मता से दिखाती है कि कैसे समय और विचारधारा के बदलाव के बीच एक पिता और पुत्र का रिश्ता बिखरने और संभलने के दोराहे पर आ खड़ा होता है।

दुर्लभ कोन्याक भाषा और 16mm रील पर हुआ जादुई फिल्मांकन

'अंग' की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी प्रामाणिकता और सिनेमाई शिल्प है। यह फिल्म लगभग पूरी तरह से 'कोन्याक' (Konyak) भाषा में बनाई गई है। कोन्याक नागालैंड के कोन्याक समुदाय की स्थानीय बोली है, जिसे भारतीय मुख्यधारा के सिनेमा में शायद ही कभी सुना गया हो।

फिल्म की वास्तविकता को बनाए रखने के लिए निर्देशक ने पारंपरिक पेशेवर कलाकारों के बजाय नागालैंड के स्थानीय जनजातीय लोगों और स्थानीय चेहरों को स्ट्रीट कास्टिंग के जरिए चुना। फिल्म में अंगलोंग कोन्याक, सोबिनो रेंगमा, गेनपाई कोन्याक और वांगटोन कोन्याक जैसे मूल निवासियों ने अभिनय किया है। इसके अलावा, फिल्म को विंटेज और कालजयी लुक देने के लिए 16mm फिल्म रील पर शूट किया गया है। इसके विजुअल्स 60 के दशक के उस अनछुए नागालैंड की धुंध, मिट्टी, रहस्यमयी जंगलों और लकड़ी के बने पारंपरिक घरों को जीवंत कर देते हैं।

शॉर्ट फिल्म से ऑस्कर के सफर तक: कौन हैं निर्देशक तेजा रियो?

नागालैंड के 31 वर्षीय प्रतिभाशाली फिल्ममेकर तेजा रियो ने यूके (ब्रिटेन) के प्रतिष्ठित 'नेशनल फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल' (NFTS) से सिनेमा की उच्च शिक्षा प्राप्त की है। वे लंबे समय से उत्तर-पूर्वी भारत की अनकही कहानियों, उपेक्षित इतिहास और वहां के जनजीवन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 'डिसोसिएट', 'चेकपोस्ट' और 'एडे ऑन ए संडे' जैसी पुरस्कार विजेता शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया था।

साल 2021 में तेजा रियो ने 'अंग' नाम से ही एक शॉर्ट फिल्म बनाई थी, जिसने फ्रांस के क्लेरमॉन्ट-फेरांड इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी अवॉर्ड जीता था। उसी शॉर्ट फिल्म की वैचारिक गहराई को विस्तार देते हुए उन्होंने अपनी सह-निर्माता नैन्सी निसा बेसो के साथ मिलकर इसे एक पूर्ण फीचर फिल्म में ढाला। बॉलीवुड फिल्मकार अनुराग कश्यप सहित देश-विदेश के कई बड़े निर्देशकों ने सोशल मीडिया पर 'अंग' की इस ऐतिहासिक सफलता को स्वतंत्र भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर बताया है।