Mythological story of Shiva's birth : कैसे रुद्र बने महादेव

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India News Live,Digital Desk : श्रावण का पवित्र माह भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है। इस महीने में भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ और व्रत करते हैं। इस अवसर पर हम आपके लिए भगवान शिव की उत्पत्ति से जुड़ी एक प्राचीन कथा लेकर आए हैं, जो पुराणों में विस्तार से वर्णित है।

विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा प्रकट हुए, और शिव का जन्म विष्णु के तेज से हुआ। कहा जाता है कि शिव सदैव योगमुद्रा में रहते थे, क्योंकि वे श्री हरि के ललाट के तेज से उत्पन्न हुए थे।

श्रीमद्भागवत में एक रोचक प्रसंग है—एक बार विष्णु और ब्रह्मा के बीच यह विवाद हो गया कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है। तभी एक दिव्य अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ, और उसी से भगवान शिव प्रकट हुए। यह क्षण उनके अद्भुत और अलौकिक अस्तित्व का प्रमाण माना जाता है।

विष्णु पुराण में वर्णन है कि एक बार ब्रह्मा को सृष्टि के लिए एक संतान की आवश्यकता थी। उन्होंने तपस्या की, और उनकी गोद में एक बालक प्रकट हुआ, जो लगातार रो रहा था। जब ब्रह्मा ने कारण पूछा, तो बालक ने कहा कि उसका कोई नाम नहीं है, इसलिए वह रो रहा है। ब्रह्मा ने उसका नाम “रुद्र” रखा, जिसका अर्थ है “रोने वाला”।

इसके बाद भी बालक का रोना नहीं रुका, तो ब्रह्मा ने उसे सात और नाम दिए—शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव। ये आठों नाम शिव के विभिन्न रूपों का प्रतीक हैं और धरती पर आज भी पूजित हैं।

शिवपुराण में एक और कथा आती है—सृष्टि के आरंभ में जब पूरा ब्रह्मांड जल में डूबा हुआ था, तब केवल ब्रह्मा, विष्णु और महेश ही विद्यमान थे। शेषनाग पर जल की सतह पर विष्णु विराजमान थे, ब्रह्मा कमल पर प्रकट हुए, और उनके बीच वार्तालाप के दौरान भगवान शिव प्रकट हुए।

ब्रह्मा ने प्रारंभ में उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया, जिससे शिव क्रोधित हो सकते थे। विष्णु ने दिव्य दृष्टि से ब्रह्मा को उनकी पहचान करवाई। तब ब्रह्मा ने अपनी भूल स्वीकार की और शिव से क्षमा मांगी। साथ ही, उन्हें अपने पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा। शिव ने इसे स्वीकार किया, और जब ब्रह्मा ने पुनः तप किया, तो शिव बालक रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए।

यह कथा दर्शाती है कि भगवान शिव न केवल अनादि और अनंत हैं, बल्कि उनकी उपस्थिति सृष्टि के आरंभ से ही रही है।