BREAKING:
July 16 2026 01:13 pm

अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल पर छूट देने से किया इनकार, भारत समेत कई देशों की बढ़ेगी टेंशन

Post

India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब रूसी और ईरानी तेल की खरीद पर दी गई पाबंदियों में छूट (Waivers) की समयसीमा को और आगे नहीं बढ़ाएगा। इस फैसले का सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ेगा जो सस्ते रूसी कच्चे तेल पर निर्भर हैं।

"ईरानियों के लिए कोई छूट नहीं": स्कॉट बेसेंट के तीखे तेवर

अमेरिकी वित्त मंत्री ने एक साक्षात्कार में दोटूक कहा कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद के लिए दी गई एकमुश्त छूट को आगे बढ़ाने का अब कोई सवाल ही नहीं उठता। बेसेंट ने कहा, "ईरानियों के लिए कोई रियायत नहीं दी जाएगी। हमने नाकाबंदी (Blockade) कर रखी है और वहां से कोई तेल बाहर नहीं आ रहा है। हमें लगता है कि अगले 2-3 दिनों में उन्हें उत्पादन पूरी तरह बंद करना होगा, जो उनके तेल के कुओं की सेहत के लिए बहुत बुरा साबित होगा।"

रूसी तेल पर भी 'नो मोर रिलैक्सेशन'

रूस के मामले में भी अमेरिका का रुख उतना ही सख्त है। बेसेंट ने कहा कि समुद्र में मौजूद रूसी पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति देने वाली छूट की अवधि को भी अब विस्तार नहीं मिलेगा। हालांकि, पिछले सप्ताह विश्व बैंक और आईएमएफ (IMF) की बैठकों के दौरान 10 से अधिक गरीब और कमजोर देशों ने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद एक संक्षिप्त अवधि के लिए छूट बढ़ाई गई थी। लेकिन अब बेसेंट का मानना है कि समुद्र में मौजूद रूसी तेल का बड़ा हिस्सा पहले ही इस्तेमाल हो चुका है, इसलिए अब और छूट की जरूरत नहीं है।

100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, ऊर्जा बाजार में खलबली

अमेरिका का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-इजराइल युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। मार्च में वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल की बिक्री पर कुछ ढील दी थी, लेकिन अब वाशिंगटन अपनी 'इकोनॉमिक ब्लॉकडे' की रणनीति पर वापस लौटता दिख रहा है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत, जो 2022 से रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, के लिए यह खबर चिंताजनक है। अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील खत्म होने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल का भुगतान और उसकी डिलीवरी प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, भारत सरकार 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक भुगतान रास्तों पर विचार कर रही है।