अधिकमास की मासिक शिवरात्रि आज, 3 साल बाद बना महासंयोग; मनचाहा हमसफर पाने के लिए करें ये अचूक उपाय
आज ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास) की मासिक शिवरात्रि है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन इस बार का संयोग बेहद खास है। लगभग 3 साल के लंबे अंतराल के बाद अधिकमास में शिवरात्रि का आगमन हुआ है। शास्त्रों की मान्यता है कि मलमास में की गई शिव पूजा से भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ जगत के पालनहार भगवान विष्णु की भी असीम कृपा प्राप्त होती है। विशेषकर वे युवा जो विवाह में देरी या प्रेम जीवन की समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए आज का दिन किसी वरदान से कम नहीं है।
आज की पूजा का शुभ मुहूर्त और निशिता काल
मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा आधी रात को की जाती है, जिसे 'निशिता काल' (Nishita Kaal) कहा जाता है।
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: आज 13 जून 2026, शनिवार को शाम 04:07 बजे से।
चतुर्दशी तिथि का समापन: कल 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12:19 बजे तक।
चूंकि शिवरात्रि की रात्रि व्यापिनी पूजा आज ही संभव है, इसलिए व्रत और विशेष अनुष्ठान आज ही संपन्न किए जाएंगे।
मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए विशेष उपाय
यदि आप अपने मनपसंद व्यक्ति से विवाह करना चाहते हैं या विवाह में लगातार अड़चनें आ रही हैं, तो आज ये उपाय जरूर करें:
शिव-पार्वती का संयुक्त पूजन: आज केवल शिवलिंग ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की भी साथ में पूजा करें। शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाएं, वहीं माता पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार की 16 वस्तुएं अर्पित करें। इससे 'गौरी-शंकर' की कृपा से विवाह के योग प्रबल होते हैं।
बेलपत्र का विशेष प्रयोग: आज शिवलिंग पर 11 या 21 बेलपत्र 'ॐ नमः शिवाय' लिखते हुए चढ़ाएं। माना जाता है कि बेलपत्र भगवान शिव के मस्तक को शीतलता प्रदान करते हैं और बदले में वे भक्त की शादीशुदा जिंदगी की हर बाधा को दूर कर देते हैं।
मंत्रों का महाजाप: आज के दिन 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥' (रुद्र गायत्री मंत्र) का जाप करना बहुत लाभकारी है। इसके अलावा कम से कम 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप करते रहें।
अधिकमास की शिवरात्रि का महत्व: क्यों है ये दुर्लभ?
अधिकमास को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है और शिवरात्रि महादेव को समर्पित है। 3 साल बाद जब ये दोनों शक्तियां एक साथ मिलती हैं, तो भक्तों को दोगुने पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से न केवल वैवाहिक क्लेश दूर होते हैं, बल्कि आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है।
व्रत के जरूरी नियम और सावधानी
मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले जातकों को कुछ कड़े नियमों का पालन करना चाहिए:
सात्विकता: आज के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को पूरी तरह शांत रखें।
व्यवहार: किसी की बुराई, निंदा या झूठ बोलने से बचें, अन्यथा व्रत का पुण्य फल नष्ट हो जाता है।
आहार: अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार आप निर्जला या फलाहारी (फल और दूध) व्रत रख सकते हैं। शाम के समय नमक का सेवन न करें।
शांति: वाद-विवाद से दूर रहें और 'शिवमय' होकर दिन व्यतीत करें।