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October 09 2026 04:57 pm

चश्मे से ही हो जाएगी UPI पेमेंट! Jio लाया AI स्मार्टग्लास, QR कोड देखते ही कटेगा पैसा

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डिजिटल पेमेंट और वियरेबल गैजेट्स की दुनिया में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक यूपीआई (UPI) पेमेंट करने के लिए जेब से स्मार्टफोन निकालना, लॉक खोलना, पेमेंट ऐप चालू करना और फिर क्यूआर कोड स्कैन करना पड़ता था। लेकिन रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक को मिलाकर एक ऐसा स्मार्टग्लास पेश किया है, जो डिजिटल लेन-देन के तरीके को पूरी तरह बदल कर रख देगा। इस नए स्मार्ट चश्मे को आंखों पर लगाने के बाद आपको किसी भी दुकान या काउंटर पर फोन निकालने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी; यह चश्मा अपनी स्मार्ट विजन तकनीक से सामने रखे क्यूआर कोड को तुरंत रीड कर लेगा और चुटकियों में सुरक्षित पेमेंट पूरा कर देगा।

कैसे काम करती है चश्मे से यूपीआई पेमेंट करने की तकनीक?

जियो के इस एआई स्मार्टग्लास के फ्रेम में हाई-रिज़ॉल्यूशन अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट कैमरा, माइक्रोफोन, ओपन-ईयर स्पीकर्स और ऑन-बोर्ड एआई प्रोसेसिंग चिपसेट दिया गया है। जब आप किसी मर्चेंट स्टोर या दुकान के काउंटर पर पहुंचते हैं और वहां लगे यूपीआई क्यूआर कोड की तरफ देखते हैं, तो चश्मे का इन-बिल्ट कैमरा कोड को तुरंत डिटेक्ट कर लेता है।

स्मार्टग्लास आपके स्मार्टफोन के सुरक्षित पेमेंट नेटवर्क या जियो वॉलेट इकोसिस्टम से ब्लूटूथ और वाई-फाई के जरिए कनेक्ट रहता है। जैसे ही क्यूआर कोड स्कैन होता है, चश्मे के लेंस पर एक वर्चुअल डिस्प्ले (HUD - Heads-Up Display) उभरता है या फिर इन-बिल्ट स्पीकर्स के जरिए यूजर को सुनाई देता है कि पेमेंट किसे जा रहा है। इसके बाद यूजर वॉइस कमांड या फ्रेम पर लगे स्मार्ट टच सेंसर के जरिए पेमेंट अमाउंट कन्फर्म करता है और सुरक्षित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से ट्रांजैक्शन सेकंडों में पूरा हो जाता है।

हैंड्स-फ्री एक्सपीरियंस के साथ मिलेंगे कई एडवांस एआई फीचर्स

यह स्मार्टग्लास केवल पेमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक संपूर्ण डिजिटल पर्सनल असिस्टेंट की तरह तैयार किया गया है। इसमें जियो के अत्याधुनिक एआई मॉडल का सपोर्ट मिलता है, जो रोजमर्रा के कई कामों को बेहद आसान बना देता है:

रियल-टाइम वॉइस असिस्टेंट: चलते-फिरते बिना स्क्रीन देखे कॉल उठाना, मैसेज पढ़ना और वॉइस कमांड से नए मैसेज भेजना।

लाइव ट्रांसलेशन: सामने लिखे किसी अन्य भाषा के बोर्ड या मेन्यू कार्ड को देखकर उसे रियल-टाइम में हिंदी या अंग्रेजी में अनुवाद करके डिस्प्ले पर दिखाना।

टर्न-बाय-टर्न विजुअल नेविगेशन: सड़क पर चलते वक्त या ड्राइविंग के दौरान चश्मे के ग्लास पर ही दिशा-निर्देश और ऐरो दिखना, जिससे मैप देखने के लिए फोन नहीं पकड़ना पड़ता।

ओपन-ईयर ऑडियो: बिना कान बंद किए म्यूजिक सुनने और कॉलिंग करने की सुविधा, जिससे यूजर आसपास की आवाजों और सड़क के ट्रैफिक के प्रति भी सचेत रहता है।

सुरक्षा और प्राइवेसी का रखा गया है पूरा ध्यान

चश्मे से सीधे वित्तीय लेन-देन होने की बात सुनते ही सबसे पहला सवाल सुरक्षा को लेकर उठता है। कंपनी ने इसमें बैंक-ग्रेड सुरक्षा मानक जोड़े हैं। कोई भी अनधिकृत व्यक्ति चश्मा पहनकर पैसे ट्रांसफर न कर सके, इसके लिए इसमें बायोमेट्रिक या वॉयस-प्रिंट ऑथेंटिकेशन और स्मार्टफोन ऐप पर पिन कन्फर्मेशन की सुरक्षा परत दी गई है।

इसके अलावा प्राइवेसी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए जब भी चश्मे का कैमरा सक्रिय होता है या पेमेंट स्कैनिंग चल रही होती है, तो फ्रेम के बाहरी हिस्से पर एक छोटी एलईडी लाइट जलती है, जिससे सामने वाले व्यक्ति को भी पता रहे कि डिवाइस एक्टिव मोड में है। यह डिवाइस भारतीय यूजर्स की जरूरतों और भारत के बेहद लोकप्रिय यूपीआई ढांचे को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो आने वाले समय में वियरेबल टेक की दुनिया में नया बेंचमार्क स्थापित कर सकती है।